
हेलसिंकी/नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हाल ही में हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना लगातार बढ़ रही है। इसी कड़ी में फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो ने इस समझौते की जमकर तारीफ करते हुए कहा है कि आज की दुनिया को टैरिफ और व्यापारिक टकराव नहीं, बल्कि फ्री ट्रेड और सहयोग की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ओर्पो ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ यह समझौता पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
ओर्पो बोले- “टैरिफ नहीं, फ्री ट्रेड ही सही रास्ता”
रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में फिनलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा,
“आज की दुनिया में ट्रेड एग्रीमेंट की वैल्यू बहुत ज्यादा है। हमें दुनियाभर में टैरिफ लगाने की नहीं बल्कि ज्यादा से ज्यादा फ्री ट्रेड की जरूरत है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड डील बेहद महत्वपूर्ण है और दुनिया को इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।”
ओर्पो ने स्पष्ट किया कि ऐसे समझौते न केवल आर्थिक अवसर बढ़ाते हैं, बल्कि देशों के बीच भरोसे और स्थिरता को भी मजबूत करते हैं।
मोदी से मुलाकात के बाद दिया बयान
फिनलैंड के प्रधानमंत्री ने यह बयान नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद दिया। इस बैठक के बाद पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने ईयू-भारत ट्रेड डील का स्वागत किया है और इसे साझा समृद्धि तथा विकास के लिए “कैटलिस्ट” बताया है।
2030 तक भारत से व्यापार दोगुना करने की तैयारी
प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो इस समय भारत दौरे पर हैं और वह यहां AI Summit में हिस्सा लेने आए हैं। उन्होंने कहा कि फिनलैंड का लक्ष्य है कि वह 2030 के दशक की शुरुआत तक भारत के साथ अपना व्यापार दोगुना करे।
ओर्पो ने यह भी कहा कि भारत और फिनलैंड मिलकर वैश्विक भागीदारों के साथ मजबूत, टिकाऊ और मानव-केंद्रित तकनीकी विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
क्या है भारत-ईयू ट्रेड डील?
भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर 27 जनवरी को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए। इस समझौते को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही थी, जो करीब 20 साल बाद जाकर पूरी हुई।
इस समझौते को बड़े स्तर पर इतना महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इसे कई विश्लेषक “मदर ऑफ ऑल डील्स” भी कह रहे हैं।
200 करोड़ लोगों का बनेगा बड़ा बाजार
इस ऐतिहासिक डील के तहत भारत और यूरोपीय संघ का एक ऐसा एकीकृत बाजार तैयार होगा, जो करीब 200 करोड़ लोगों को प्रभावित करेगा। इससे दोनों क्षेत्रों में व्यापार, निवेश, तकनीक और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी में इस समझौते की औपचारिक घोषणा की थी।
निष्कर्ष: वैश्विक व्यापार को नई दिशा दे सकती है यह डील
फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो का यह बयान साफ संकेत देता है कि भारत-ईयू ट्रेड डील को केवल एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक आर्थिक संतुलन में एक नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दुनिया को यह संदेश देता है कि व्यापार युद्ध और टैरिफ की राजनीति के बजाय सहयोग और साझेदारी ही विकास का सबसे मजबूत रास्ता है।
