Thursday, February 19

गाजा संकट में फंसा पाकिस्तान, सेना भेजने को तैयार असीम मुनीर! ट्रंप से मिलने अमेरिका रवाना हुए शहबाज शरीफ

वॉशिंगटन। गाजा में जारी युद्ध और हमास के खिलाफ प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियान को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में उथल-पुथल तेज हो गई है। इसी बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस सप्ताह अमेरिका दौरे पर रवाना हो गए हैं, जहां उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होने वाली है।

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शहबाज शरीफ का यह दौरा ट्रंप की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली ‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ बैठक से जुड़ा हुआ है। इस बैठक में करीब 20 देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेंगे और गाजा में स्थिरता बहाल करने के लिए बनाई जा रही अंतरराष्ट्रीय योजना पर चर्चा होगी।

गाजा में सैनिक भेजने को लेकर पाकिस्तान की बेचैनी

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने पाकिस्तान के तीन सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि पाकिस्तान चाहता है कि अमेरिका उसे यह भरोसा दे कि गाजा में भेजे जाने वाले पाकिस्तानी सैनिकों को हमास के खिलाफ लड़ाई में नहीं झोंका जाएगा, बल्कि उन्हें केवल शांति स्थापना (Peacekeeping Mission) के लिए तैनात किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान गाजा में प्रस्तावित ‘इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स’ (ISF) में हिस्सा लेने के लिए तैयार है, लेकिन वह स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसकी सेना को किसी प्रकार की प्रत्यक्ष युद्ध कार्रवाई में शामिल न किया जाए।

पाकिस्तान के लिए घरेलू मोर्चे पर बड़ा संकट

गाजा में सेना भेजने की खबरों के बाद पाकिस्तान की सरकार देश के अंदर भारी दबाव में आ गई है। विपक्ष और धार्मिक संगठन पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह अमेरिका के दबाव में फिलिस्तीन के मुद्दे पर गलत कदम उठा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर जनता को भ्रमित करने के लिए यह प्रचार कर रही है कि वह ट्रंप से “गारंटी” मांगेगी, जबकि वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान के पास अमेरिका को मना करने की ताकत नहीं है।

असीम मुनीर भी सेना भेजने के लिए तैयार!

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की सेना और उसके प्रमुख जनरल असीम मुनीर गाजा में सैनिक भेजने को लेकर सहमत हैं। लेकिन सरकार को डर है कि यदि यह फैसला खुलकर सामने आया तो पाकिस्तान के भीतर बड़ा राजनीतिक और जनाक्रोश खड़ा हो सकता है।

‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ बैठक में क्या होगा फैसला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार को होने वाली बैठक में डोनाल्ड ट्रंप गाजा के लिए बड़े आर्थिक और सैन्य फैसलों की घोषणा कर सकते हैं। संभावित एजेंडा में शामिल हैं—

  • गाजा के पुनर्निर्माण के लिए कई अरब डॉलर के फंड का ऐलान

  • ट्रंप प्रशासन द्वारा 5 अरब डॉलर के शुरुआती पैकेज की घोषणा

  • गाजा में स्थिरता के लिए इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) की विस्तृत योजना

  • हमास से हथियार छीनने और निरस्त्रीकरण की रणनीति

  • गाजा के प्रशासन के लिए टेक्नोक्रेटिक कमेटी के गठन पर विचार

हजारों सैनिकों की तैनाती पर चर्चा

बैठक में हजारों अंतरराष्ट्रीय सैनिकों और पुलिसकर्मियों की तैनाती पर चर्चा होने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया पहले ही 8,000 सैनिक भेजने की प्रतिबद्धता जता चुका है।

पाकिस्तान भी शुरुआत में कुछ हजार सैनिक भेजने पर सहमत बताया जा रहा है।

शहबाज शरीफ की रणनीति: नियम और कमांड की स्पष्टता चाहते हैं

रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि शहबाज शरीफ इस दौरे के दौरान ISF की भूमिका, अधिकार, चेन ऑफ कमांड और संचालन की जिम्मेदारी को लेकर पूरी स्पष्टता चाहते हैं।

शहबाज शरीफ के एक करीबी सहयोगी ने कहा,
“हम सैनिक भेजने के लिए तैयार हैं, लेकिन हमारे सैनिक केवल शांति मिशन का हिस्सा होंगे। हम हमास को निरस्त्र करने जैसे किसी रोल का हिस्सा नहीं बनेंगे।”

प्रोपेगेंडा या रणनीति? अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की शंका

जियो-पॉलिटिकल विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान सरकार जानबूझकर यह संदेश फैलाने की कोशिश कर रही है कि वह अपने सैनिकों को हमास के खिलाफ नहीं भेजेगी। इसका उद्देश्य घरेलू जनता और धार्मिक गुटों को शांत करना है।

विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान के लिए अमेरिका के सामने शर्तें रखना आसान नहीं है, इसलिए यह पूरी खबर “डैमेज कंट्रोल” रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है।

निष्कर्ष: गाजा संकट में पाकिस्तान की स्थिति बेहद नाजुक

गाजा में सैनिक भेजने का मुद्दा पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक चुनौती बन गया है और घरेलू राजनीति में भी आग भड़का रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि शहबाज शरीफ की ट्रंप से मुलाकात के बाद पाकिस्तान गाजा मिशन में किस भूमिका में नजर आता है—शांति रक्षक के रूप में या युद्ध के सहयोगी के रूप में।

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