
पटना/दिल्ली: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को राहत मिली है। देवघर जिला कोषागार घोटाले मामले में उन्हें मिली सजा निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब 22 अप्रैल तक टाल दी गई है। इससे लालू यादव अब सुकून से होली का त्योहार मना सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह ने कहा कि मामले की दलीलें पूरी नहीं हुई हैं और कुछ प्रतिवादी अब जीवित नहीं हैं। इसलिए सुनवाई अप्रैल में होगी।
सजा निलंबन को चुनौती देने की सीबीआई याचिका
सीबीआई ने झारखंड उच्च न्यायालय से लालू यादव को मिली जमानत को चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि देवघर कोषागार में हुए घोटाले में लालू ने पद का दुरुपयोग किया और जांच के लिए संबंधित फाइल को अपने पास रोके रखा। सीबीआई ने कहा कि अन्य आरोपियों के साथ लालू अवैध रूप से बाहर हैं और दोषसिद्धि के बाद की स्थिति पर रोक लगनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में लालू की ओर से पेश हुए कपिल सिब्बल
सुनवाई के दौरान लालू की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने कहा कि कुछ आरोपियों को नोटिस नहीं दिया गया। पीठ ने कहा कि मामलों की फाइलें लटकी हुई हैं और अप्रैल में सुनवाई की तारीख दी जाएगी। मृत प्रतिवादियों के मामले बंद कर दिए जाएंगे।
देवघर कोषागार घोटाला: सजा और राशि
झारखंड उच्च न्यायालय ने पिछले साल जुलाई में लालू यादव को देवघर कोषागार घोटाले में दोषी ठहराया। विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें 89 लाख रुपए के गबन के मामले में साढ़े तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी। इस घोटाले में समय रहते पद का दुरुपयोग और फर्जी रसीद के माध्यम से धन की हेराफेरी शामिल है।
लालू के चार अन्य चारा घोटाले
लालू यादव को चारा घोटाले के अलावा चाईबासा, दुमका और डोरंडा से जुड़े तीन अन्य मामलों में भी सजायाफ्ता किया गया है। स्वास्थ्य आधार पर उन्हें जमानत मिली हुई है, लेकिन यह मामला उनके राजनीतिक और कानूनी जीवन में संवेदनशील बना हुआ है।
