
वॉशिंगटन: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपना सैन्य दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट में लड़ाकू विमानों, जंगी जहाजों और एयर डिफेंस सिस्टम का बड़े पैमाने पर जमावड़ा कर रही है। यह कदम मंगलवार को जेनेवा में ईरान के साथ होने वाली परमाणु वार्ता से पहले उठाया गया है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन में तैनात अमेरिकी एयरफोर्स के एसेट्स को मिडिल ईस्ट के नजदीक लाया जा रहा है। इसमें रीफ्यूलिंग टैंकर और F-15 फाइटर जेट शामिल हैं। फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि हाल के हफ्तों में अमेरिका से जॉर्डन, बहरीन और सऊदी अरब तक 250 से अधिक मिलिट्री कार्गो फ्लाइट्स जा चुकी हैं।
फाइटर जेट की तैनाती
25 जनवरी को जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर 14 अमेरिकी F-15 फाइटर जेट तैनात किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईरान के संभावित जवाबी हमले से निपटने की तैयारी है।
डोनाल्ड ट्रंप की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्तों में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की बार-बार धमकी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान में ‘शासन परिवर्तन’ सबसे अच्छी चीज हो सकती है।
क्या अमेरिका ईरान में हमला कर सकता है?
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन अभी तक यह नहीं तय कर पाया है कि यदि ईरानी शासन को हटाया गया तो आगे क्या होगा। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कांग्रेस में कहा कि कोई नहीं जानता कि ईरान में सत्ता का वैकल्पिक नेतृत्व कौन संभालेगा।
वेनेजुएला की तरह आसान नहीं ईरान
विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान अमेरिका के लिए वेनेजुएला जैसी आसान टार्गेट नहीं है। जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ कार्रवाई से पहले अमेरिकी इंटेलिजेंस को सत्ता समीकरणों की पूरी जानकारी थी, लेकिन ईरान में ऐसा नहीं है। ईरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की जगह कौन ले सकता है, इस पर संदेह बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले महीने जब ईरान में प्रदर्शन चरम पर थे, उस समय सैन्य कार्रवाई का अवसर बेहतर था। अब यदि हमला किया गया, तो यह संदेह है कि वह वही परिणाम दे पाएगा।
