
पटना, 17 फरवरी 2026: बिहार की राजनीति में सुशील कुमार मोदी का नाम भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले नेताओं में शुमार है। उन्हें व्हिसल ब्लोअर कहा जाता है, यानी वह व्यक्ति जो भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर कर जनता और अदालत तक पहुँचाता है।
लैंड फॉर जॉब केस: ट्रायल तक पहुँचने की कहानी
लैंड फॉर जॉब मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव और हेमा यादव अब अदालत में आरोपों का सामना करेंगे। इस मामले को ट्रायल तक पहुँचने में करीब 18 साल लग गए।
इस केस की शुरुआत 2008 में हुई, जब तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव पर जमीन के बदले नौकरी देने का आरोप लगा। शिवानंद तिवारी और जदयू नेता ललन सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
टर्निंग प्वाइंट: 4 अप्रैल 2017
सभी घटनाओं का मोड़ आया 4 अप्रैल 2017 को, जब सुशील मोदी ने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तेज प्रताप यादव पर ‘मिट्टी घोटाले’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लालू परिवार के बनाए जा रहे मॉल से निकली मिट्टी पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान को बेची गई। उस समय तेज प्रताप यादव वन और पर्यावरण मंत्री थे।
बिहार सरकार ने तब क्लीन चिट दे दी, लेकिन यह मामला सुशील मोदी के लिए लालू परिवार की अवैध संपत्तियों की जांच का आधार बन गया। इसके बाद उन्होंने तीन महीने में करीब 40 प्रेस कॉन्फ्रेंस की और लालू परिवार से जुड़ी अवैध संपत्तियों के दस्तावेज सार्वजनिक किए।
कार्रवाई और चार्जशीट
सुशील मोदी के लगातार प्रयासों और सबूतों की वजह से सीबीआई ने मई 2022 में लालू यादव के 15 ठिकानों पर छापेमारी की। अक्टूबर 2022 में सीबीआई ने 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और जून 2024 में अंतिम चार्जशीट में 78 लोगों को आरोपी बनाया। इसमें नौकरी पाने वाले 38 उम्मीदवार भी शामिल थे।
अब 2026 में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू परिवार के छह सदस्यों समेत 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए हैं, जिन्हें ट्रायल का सामना करना होगा।
निष्कर्ष
सुशील कुमार मोदी की पहल के बिना यह मामला वर्षों तक फाइलों में ही दबा रह सकता था। उनकी भूमिका न केवल राजनीतिक साहस की मिसाल है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में व्हिसल ब्लोअर की अहमियत को भी रेखांकित करती है।
