
पटना: बिहार की न्यायपालिका ने संवेदनशीलता और मानवता का उदाहरण पेश किया है। 15 साल पुराने ट्रैक्टर लोन धोखाधड़ी मामले में 90 वर्षीय बुजुर्ग जय नारायण सिंह के लिए सीबीआई विशेष न्यायाधीश अविनाश कुमार खुद कोर्ट रूम से बाहर आए और उनकी कार के पास मामले की सुनवाई की। लगभग 35 मिनट तक कार के पास ही कानूनी प्रक्रिया चली, जिसमें जज ने बुजुर्ग की लाचारी और केस की तहकीकात की।
15 साल पुराना मामला
मामला साल 2011 का है, जब जमुई निवासी जय नारायण सिंह पर यूको बैंक से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 4–5 लाख रुपए का ट्रैक्टर लोन लेने का आरोप लगा था। जांच में कागजात अवैध पाए गए थे और तब से यह केस अदालत में लंबित था।
कार बन गई अदालत
सोमवार को सुनवाई के दौरान बुजुर्ग आरोपी अदालत के अंदर पेश होने में असमर्थ थे। संवेदनशीलता दिखाते हुए जज अविनाश कुमार ने सुबह 11 बजे कोर्ट से बाहर निकलकर उनके वाहन के पास आकर सुनवाई की। उन्होंने सभी पक्षों को सुना और यह सुनिश्चित किया कि अभियुक्त वास्तव में शारीरिक रूप से असमर्थ हैं।
मामला समाप्ति पर पहुँचा
सुनवाई में जय नारायण सिंह ने अपनी गलती स्वीकार की। अदालत ने सुधारात्मक रुख अपनाते हुए बैंक से ली गई राशि लौटाने और उचित जुर्माना भरने की शर्त पर केस बंद कर दिया। डेढ़ दशक पुराने इस विवाद का सुखद अंत हुआ और बुजुर्ग आरोपी को राहत मिली।
विशेष न्यायाधीश अविनाश कुमार के इस कदम की हर तरफ सराहना हो रही है, जिसे कानूनी इतिहास में विरले ही देखने को मिलता है।
