
नई दिल्ली/मुंबई: वैश्विक राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारत ने ईरान के तीन ऑयल शिप्स – स्टेलर रूबी, एस्फाल्ट स्टार और अल जफजिया – को अपने समुद्री क्षेत्र में जब्त कर लिया है। इन जहाजों पर पहले ही अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखा था।
सूत्रों के अनुसार, तीनों जहाज तटीय पुलिस की निगरानी से बचने के लिए अक्सर अपनी पहचान बदलते थे। इनके मालिक विदेश में रहते हैं। इस मामले को लेकर भारतीय अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर 6 फरवरी को पोस्ट किया था, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया।
समुद्री सीमा की सुरक्षा
भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके समुद्री क्षेत्र का उपयोग शिप-टू-शिप ट्रांसफर के लिए न किया जाए। अक्सर इस तरह के ट्रांसफर का इस्तेमाल तेल कार्गो की असल पहचान छिपाने और पाबंदियों को बायपास करने के लिए किया जाता है।
भारतीय अधिकारियों के अनुसार, तीनों जहाज मुंबई से लगभग 100 नॉटिकल मील पश्चिम में रोके गए और आगे की जांच के लिए मुंबई लाया गया। इंडियन कोस्ट गार्ड ने निगरानी बढ़ा दी है। अब लगभग 55 जहाज और 10-12 एयरक्राफ्ट चौबीसों घंटे समुद्री इलाकों पर नजर रख रहे हैं।
अमेरिका और भारत के संबंधों पर असर
ईरानी जहाजों की जब्ती ऐसे समय में हुई है जब US-भारत संबंधों में सुधार देखा जा रहा है। वॉशिंगटन ने हाल ही में घोषणा की कि भारत से आयात पर लागू इंपोर्ट टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया जाएगा। अमेरिका का दावा है कि नई दिल्ली ने रूस से तेल आयात रोकने पर सहमति दी है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरानी पक्ष ने जहाज और उसमें मौजूद सामान से किसी तरह के संबंध को खारिज किया है। नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह भारत और अमेरिका के बीच की कार्रवाई है, ईरान का इसमें कोई लेना-देना नहीं।
क्यों उठाया इतना रिस्क?
उन तेल और फ्यूल पर पाबंदी होने के कारण इनका ट्रेड अत्यधिक रिस्की होता है। बिचौलिये अक्सर लेयर्ड ओनरशिप, गलत पेपरवर्क और बीच समुद्र में ट्रांसफर का सहारा लेते हैं, ताकि कार्गो की असली पहचान छिपाई जा सके और निगरानी से बचा जा सके।
