Tuesday, February 17

दिल्ली में अब सीएनजी और इलेक्ट्रिक दाह संस्कार मुफ्त, प्रदूषण घटाने के लिए MCD का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्रदूषण को कम करने की दिशा में नगर निगम (MCD) ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब एमसीडी के अधीन आने वाले श्मशान घाटों में सीएनजी और इलेक्ट्रिक माध्यम से दाह संस्कार पूरी तरह मुफ्त किया जाएगा। इसके लिए अब किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।

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यह व्यवस्था एमसीडी द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू की जा रही है, जो अगले दो वर्षों तक लागू रहेगी।

MCD हाउस मीटिंग में प्रस्ताव पास

एमसीडी के नेता सदन प्रवेश वाही ने बताया कि सोमवार को एमसीडी की हाउस मीटिंग में इस संबंध में एक प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसके बाद अब श्मशान घाटों में सीएनजी और इलेक्ट्रिक से अंतिम संस्कार कराने पर लोगों से कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा।

39 श्मशान घाटों का संचालन करती है MCD

एमसीडी फिलहाल दिल्ली में कुल 39 श्मशान घाट, कब्रिस्तान और ईसाई कब्रिस्तान संचालित करती है। इनमें से अधिकांश का संचालन विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन (RWA), सहायक समूहों और ट्रस्टों द्वारा किया जाता है।
ये संस्थाएं नो लॉस-नो प्रॉफिट के आधार पर काम करती हैं।

लकड़ी से बढ़ता है धुआं, AQI पर पड़ता है असर

एमसीडी का कहना है कि परंपरागत लकड़ी से दाह संस्कार करने पर बड़ी मात्रा में धुआं निकलता है, जिससे दिल्ली की वायु गुणवत्ता (AQI) पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसी कारण सीएनजी और इलेक्ट्रिक माध्यम से दाह संस्कार को बढ़ावा देने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

एमसीडी अधिकारियों के अनुसार हाल ही में एमसीडी कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जनता को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

लकड़ी से दाह संस्कार पर 6000, सीएनजी से 1500 रुपये खर्च

अधिकारियों ने बताया कि लकड़ी से दाह संस्कार करने पर औसतन करीब 6000 रुपये का खर्च आता है, जबकि सीएनजी माध्यम से दाह संस्कार पर लगभग 1500 रुपये का खर्च पड़ता है।

अब यह खर्च भी लोगों से नहीं लिया जाएगा, जिससे आम नागरिकों को आर्थिक राहत के साथ-साथ पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।

MCD पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ, फिर भी लिया गया फैसला

एमसीडी के अनुसार वर्ष 2023, 2024 और 2025 में कुल दाह संस्कारों में से केवल 8 से 9 प्रतिशत ही सीएनजी या इलेक्ट्रिक माध्यम से किए गए।

इस फैसले से एमसीडी पर सालाना लगभग दो करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। वहीं यदि यह आंकड़ा बढ़कर 25 प्रतिशत तक पहुंचता है, तो एमसीडी पर हर महीने लगभग 10 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आने की संभावना है।

इसके बावजूद प्रदूषण कम करने और स्वच्छ विकल्पों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है।

पर्यावरण और जनता दोनों को राहत

एमसीडी का यह निर्णय दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल हवा की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी, बल्कि आम लोगों को अंतिम संस्कार के खर्च में भी बड़ी राहत मिलेगी।

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