Tuesday, February 17

दिल्ली में नाबालिगों का बढ़ता अपराध: स्ट्रीट क्राइम बन रही संगठित अपराध की पहली सीढ़ी

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में नाबालिगों की बढ़ती आपराधिक गतिविधियां अब पुलिस और समाज दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। हालात यह हैं कि छोटी उम्र के बच्चे अब सिर्फ चोरी या झपटमारी तक सीमित नहीं रह गए, बल्कि धीरे-धीरे संगठित अपराध, ड्रग्स सप्लाई, शराब तस्करी, हथियारों की डिलीवरी, सट्टेबाजी, वसूली और यहां तक कि हत्या जैसी वारदातों में भी शामिल होते जा रहे हैं।

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पुलिस सूत्रों के अनुसार, कई बड़े अपराधी गिरोह और गैंगस्टर नेटवर्क नाबालिगों को “सुरक्षित हथियार” की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि किशोर न्याय कानून के तहत इन्हें जल्दी जमानत या रिहाई मिल जाती है। यही वजह है कि गैंगस्टर इन्हें आगे कर अपराधों को अंजाम दिलवा रहे हैं।

चोरी और स्नैचिंग से शुरू होकर गैंगस्टर नेटवर्क तक पहुंच रहे बच्चे

दिल्ली की तंग गलियों से लेकर बाहरी कॉलोनियों तक एक चिंताजनक बदलाव सामने आ रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, नाबालिगों में अपराध की शुरुआत अक्सर छोटी चोरी, मोबाइल स्नैचिंग, मारपीट या बाइक चोरी से होती है। इसके बाद वे धीरे-धीरे चाकू और हथियारों के साथ लूटपाट करने लगते हैं और फिर संगठित अपराध के जाल में फंस जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

पुलिस आंकड़ों में बढ़ोतरी ने बढ़ाई चिंता

2024 और 2025 के आंकड़ों का अध्ययन करने पर सामने आया है कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • मारपीट के मामलों में 99 की बढ़ोतरी

  • चोरी और सेंधमारी के मामलों में 65 केस अधिक

  • आईपीसी/बीएनएस के तहत 2024 की तुलना में 2025 में 6050 केस ज्यादा दर्ज

हालांकि आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, एक्साइज एक्ट और गैंबलिंग एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 2025 में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन कुल अपराध के आंकड़े गंभीर स्थिति दर्शाते हैं।

कैसे गिरोहों के जाल में फंस जाते हैं नाबालिग?

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अधिकतर नाबालिग अपराधी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। कई बच्चे स्कूल छोड़ चुके होते हैं और कुछ नशे की लत के शिकार हो जाते हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया भी अपराध की ओर आकर्षण बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

गैंगस्टर पहले इन बच्चों को “भाईचारे” का एहसास कराते हैं, फिर उन्हें अपने प्रभाव, डर और ऐशो-आराम का प्रदर्शन दिखाकर प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे बच्चों को खाने, कपड़े, मोबाइल और पैसे का लालच देकर अपराध की दुनिया में धकेल दिया जाता है।

पहले लालच, फिर अपराध में धकेलने की रणनीति

पुलिस के अनुसार गैंगस्टर पहले बच्चों को छोटे कामों में लगाते हैं, जैसे शराब या ड्रग्स की सप्लाई, सट्टा संचालन, वसूली के लिए धमकी देना आदि। एक-दो बार पकड़े जाने के बाद जब उन्हें जल्दी रिहाई मिल जाती है, तो उनके मन से कानून का डर खत्म हो जाता है। इसके बाद वे अपराध को एक सामान्य काम मानने लगते हैं।

अधिकतर मामलों में नाबालिग सिर्फ “फ्रंट फेस” होते हैं, जबकि अपराध की असली योजना बड़े गैंग तैयार करते हैं।

हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला, कई सनसनीखेज केसों में नाबालिग शामिल

हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट में ऐसा मामला सामने आया, जिसमें एक महिला नाबालिग के जरिए शराब की सप्लाई करवा रही थी। इसके अलावा 2024 में जीटीबी अस्पताल में हुए सनसनीखेज मर्डर केस में भी नाबालिगों की भूमिका सामने आई थी।

पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले दर्ज हुए हैं, जहां नाबालिग हथियारों की सप्लाई, शराब तस्करी, ड्रग्स डिलीवरी और वसूली के लिए फायरिंग जैसी घटनाओं में पकड़े गए हैं।

हालिया घटनाएं: नाबालिगों के हाथों हत्या के मामले बढ़े

दिल्ली में हाल के दिनों में कई ऐसे जघन्य अपराध सामने आए हैं, जिनमें नाबालिगों की भूमिका ने लोगों को चौंका दिया।

2 फरवरी 2026: बाजार में चाकू मारकर हत्या

मयूर विहार के आचार्य निकेतन में अरुण (22) की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में तीन नाबालिगों को पकड़ा गया।

9 फरवरी 2026: पार्क में खड़े होने के विवाद में हत्या

मोती नगर स्थित डीएलएफ पार्क में खड़े होने के विवाद में पांच नाबालिगों ने एक युवक को चाकू मारकर मौत के घाट उतार दिया।

22 जनवरी 2026: रकम के बंटवारे को लेकर हत्या

प्रीत विहार इलाके में आपराधिक रकम के बंटवारे को लेकर हत्या की गई। पुलिस ने चार आरोपियों को पकड़ा, जिनमें तीन नाबालिग थे।

दिल्ली में सक्रिय नाबालिगों के चर्चित गैंग

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के कई इलाकों में नाबालिगों ने अपने गिरोह बना लिए हैं, जो हथियारों के दम पर लूटपाट और वसूली करते हैं। कई गैंग सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर अपना खौफ फैलाते हैं।

दिल्ली में चर्चा में रहे कुछ नाबालिग गैंग:

  • मस्तान गैंग (सीलमपुर)

  • माया गैंग (भजनपुरा)

  • मकोका गैंग (वेलकम)

  • अल्लू-अनस गैंग (जाफराबाद)

  • चौधरी गैंग (वेलकम)

  • शूटर गैंग (ज्वाला नगर, शाहदरा)

  • MJ गैंग (आनंद पर्वत)

  • 78 गैंग (पटेल नगर)

  • सरकार गैंग (बलजीत नगर)

  • भगत सिंह ग्रुप (बलजीत नगर)

  • अनस गैंग (जहांगीरपुरी)

पुलिस के अनुसार इन गिरोहों का इस्तेमाल अब लॉरेंस बिश्नोई, हाशिम बाबा जैसे बड़े अपराधी नेटवर्क भी एक्सटॉर्शन और फायरिंग जैसी घटनाओं में कर रहे हैं।

समाज के लिए चेतावनी: अपराध की ओर बढ़ता बचपन

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल अपराध का मुद्दा नहीं, बल्कि बचपन के भटकाव और सामाजिक विफलता का भी संकेत है। यदि समय रहते शिक्षा, रोजगार, परामर्श और सख्त निगरानी के जरिए इन बच्चों को सही दिशा नहीं दी गई, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और भयावह रूप ले सकती है।

निष्कर्ष

दिल्ली में नाबालिगों द्वारा अपराध का बढ़ता ग्राफ राजधानी की कानून व्यवस्था के साथ-साथ समाज के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। स्ट्रीट क्राइम अब अपराध की पहली सीढ़ी बन चुका है, जो बच्चों को संगठित अपराध की गहरी दुनिया में धकेल रहा है।

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