
ढाका: बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम शासन ने 18 महीने तक देश की कमान संभाली। आज, बांग्लादेश के 300 में से 299 सीटों के लिए मतदान शुरू हो चुका है, और इस चुनाव के बाद यूनुस का दौर समाप्त होने जा रहा है।
यूनुस ने चुनाव से पहले कहा कि उनका मुख्य मकसद नई सरकार को सत्ता का निर्बाध ट्रांसफर करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीफ एडवाइज़र के रूप में उनकी भूमिका केवल अंतरिम “ट्रांज़िशन गार्डियन” की है और उन्होंने स्थायी राजनीतिक पद की कोई आकांक्षा नहीं रखी। चुनावी नतीजे घोषित होने के बाद वे नई सरकार को सभी शक्तियां सौंप देंगे।
जुलाई नेशनल चार्टर-2025 लागू करने की तैयारी
यूनुस का अगला कदम जुलाई नेशनल चार्टर-2025 को लागू करना है। इस चार्टर के तहत कुछ बड़े कानूनी और संवैधानिक सुधारों की योजना है, जैसे:
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भारत जैसे देशों की तर्ज पर दो सदनों वाली संसद का निर्माण
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प्रधानमंत्री के कार्यकाल और शक्तियों की सीमा तय करना
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प्रधानमंत्री के लिए दो कार्यकाल या 10 साल तक का नियम
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शेख हसीना के खिलाफ हुए प्रदर्शन को संवैधानिक मान्यता
चुनाव के बाद यूनुस का ध्यान नई सरकार को सत्ता सौंपने और देश में व्यवस्था बनाए रखने पर रहेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके बाद उनका फोकस ‘यूनुस सेंटर’ और ग्रामीण बैंक के माध्यम से सोशल बिजनेस और गरीबी उन्मूलन पर होगा।
मोहम्मद यूनुस की विरासत: उपलब्धियाँ और आलोचनाएँ
यूनुस को बांग्लादेश में ध्रुवीकरण करने वाले नेता के रूप में भी याद किया जाएगा। लेकिन उनके कुछ योगदान भी महत्वपूर्ण हैं:
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देश को संभाला: अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुखिया के रूप में देश को गृहयुद्ध से बचाया।
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संवैधानिक सुधारों की पहल: जुलाई नेशनल चार्टर-2025 के जरिए संसद और प्रधानमंत्री पद में सुधार करने की कोशिश।
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डिप्लोमैटिक प्रयास: IMF और वर्ल्ड बैंक से मदद हासिल की, अमेरिका, चीन और पाकिस्तान के साथ आर्थिक और राजनीतिक संबंध मजबूत किए।
हालांकि उनकी आलोचना भी होती रही है:
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कट्टरपंथी तत्वों को बढ़ावा: जमात-ए-इस्लामी के चरमपंथी नेताओं को रिहा कर देश में धार्मिक कट्टरपंथ को बढ़ावा देना।
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अल्पसंख्यकों पर हिंसा: हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा रोकने में नाकामी।
आर्थिक हालात और भविष्य की चुनौतियाँ
यूनुस के शासनकाल में महंगाई थोड़ी कम हुई, लेकिन बेरोजगारी और आर्थिक संकट गहरा गया। मैन्युफैक्चरिंग और कपड़ा उद्योग संघर्षरत हैं। उनके ‘नया बांग्लादेश’ के वादे आम जनता की पहुँच से दूर रहे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यूनुस का जाना केवल एक चरण है; अगर नई सरकार आर्थिक सुधारों और उद्योगों को नहीं बचा पाई तो देश में स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।
