
मॉस्को: अमेरिका की कोशिशों के बावजूद भारत और रूस आपसी रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देश रिश्तों को मजबूत करने के नए रास्ते तलाश रहे हैं और रूस भारतीय आयात बढ़ाने पर काम कर रहा है।
अलीपोव ने बताया कि इस कदम से खेती के बाजार में ज्यादा पहुंच बनेगी और फर्टिलाइजर निर्माण में जॉइंट वेंचर बनाने के मौके खुलेंगे। उन्होंने कहा, “हम भारतीय साझेदारों के साथ हर बार सहयोग जारी रखने के अवसर पाते हैं, भले ही पश्चिमी देशों की तरफ से प्रतिबंध और दबाव रहे।”
रूसी तेल और अमेरिकी दबाव
राजदूत का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने भारत को रूस से तेल न खरीदने का दबाव बनाया है। अमेरिका-भारत ट्रेड डील के फ्रेमवर्क के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25% टैरिफ हटाया, लेकिन चेताया कि रूस से तेल खरीदने पर टैरिफ फिर से लग सकता है।
इसके बावजूद अलीपोव ने कहा कि रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते कुछ शिपमेंट वॉल्यूम पर असर पड़ा, लेकिन भारत के साथ सहयोग जारी है और भारतीय ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करना दोनों देशों के लिए प्राथमिकता है।
दशकों पुरानी दोस्ती
रूस भारत का दशकों से प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है और अब यह ऊर्जा सुरक्षा में भी भरोसेमंद साथी बन चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण और बाजार की सही स्थिति के अनुसार निर्णय लेना देश की रणनीति का हिस्सा है।
