
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर अब शेयर बाजार और रोज़गार की दुनिया दोनों पर दिखने लगा है। एंथ्रोपिक की नई AI तकनीक के लॉन्च के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गई। भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा, खासकर आईटी सेक्टर की कंपनियों के शेयर लुढ़क गए।
व्हाइट कॉलर जॉब्स पर संकट:
AI की तेजी से एंट्री-लेवल टेक नौकरियों की मांग और वेतन प्रभावित हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब कुछ प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन एंट्री-लेवल IT प्रोफेशनल्स से ज्यादा कमा रहे हैं। यह बदलाव उन दस साल पहले की सोच को भी चुनौती देता है, जब टेक सेक्टर में शुरुआत करने वाले युवा जल्दी तरक्की और बेहतर वेतन की उम्मीद रखते थे।
शेयर बाजार पर असर – ‘SaaSpocalypse’
हाल ही में एंथ्रोपिक ने Claude Cowork नामक नया AI टूल लॉन्च किया। इस टूल के आने के बाद दुनिया भर के सॉफ्टवेयर कंपनियों का मार्केट कैप लगभग 285 अरब डॉलर तक गिर गया। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इसे ‘SaaSpocalypse’ कहा। Claude Cowork इंसान और AI एजेंट को एक डिजिटल वर्कस्पेस में मिलाकर कानूनी, बिक्री, मार्केटिंग और डेटा एनालिसिस जैसे काम ऑटोमेट कर देता है। इससे डर है कि भविष्य में यह AI इंसानों की जगह ले सकता है, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बना रहेगा।
भारत में भी स्थिति गंभीर:
भारत में एंट्री-लेवल आईटी और ITeS (IT-enabled Services) प्रोफेशनल्स की सैलरी पहले के मुकाबले कम हो रही है। इसके उलट प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन अब इनकी तुलना में बेहतर कमा रहे हैं।
अर्बन कंपनी का डेटा:
होम सर्विस प्लेटफॉर्म अर्बन कंपनी (Urban Company – UC) के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में उनके पार्टनर्स ने औसतन 28,322 रुपये प्रति माह कमाए। टॉप वर्कर्स की कमाई इससे भी अधिक है:
-
टॉप 20%: 42,418 रुपये/माह
-
टॉप 10%: 47,471 रुपये/माह
-
टॉप 5%: 51,673 रुपये/माह
अर्बन कंपनी के सीईओ अभिरज सिंह भाल ने इस डेटा को ‘सम्मानजनक, स्किल-आधारित काम की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव’ बताया। उनका कहना है कि यह कमाई न्यूनतम वेतन से काफी ऊपर है और कई मामलों में एंट्री-लेवल IT सैलरी के बराबर या उससे बेहतर है।
निष्कर्ष:
AI तकनीक के तेजी से फैलने के चलते टेक्नोलॉजी सेक्टर में नौकरियों पर दबाव बढ़ गया है। वहीं, पारंपरिक होम सर्विस वर्क जैसे प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन अब आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी साबित हो रहे हैं। यह बदलाव न केवल नौकरी बाजार की संरचना बदल रहा है बल्कि भविष्य में व्हाइट-कॉलर जॉब्स की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है।