
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी प्रदेश कार्यकारिणी में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। पार्टी नेतृत्व का ध्यान अब नए और सक्रिय नेताओं को कार्यकारिणी में जगह देने पर केंद्रित है। इसके साथ ही संगठन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सभी क्षेत्रों का दौरा किया और प्रदेश व क्षेत्रीय पदाधिकारियों से मुलाकात कर नई कार्यकारिणी के मसलों पर मंथन किया। हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह की लखनऊ यात्रा के दौरान भी नई कार्यकारिणी पर चर्चा हुई। अब केंद्रीय नेतृत्व की सलाह से प्रदेश अध्यक्ष व महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह नई कार्यकारिणी को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
लंबे समय से कार्यकारिणी में रहे पदाधिकारियों की सूची तैयार
सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से कार्यकारिणी में शामिल नेताओं की लिस्ट बनाई जा रही है। इसमें उन पदाधिकारियों के नाम शामिल हैं जिन्होंने संगठन में लंबे समय तक योगदान दिया है और वर्तमान में सांसद, विधायक या एमएलसी भी हैं। इन पदाधिकारियों की जगह नए और सक्रिय नेताओं को शामिल करने की योजना पर विचार चल रहा है।
मौजूदा वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं:
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संतोष सिंह – पांच बार मंत्री, दो बार उपाध्यक्ष, वर्तमान में एमएलसी और ब्रज क्षेत्र प्रभारी।
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विजय बहादुर पाठक – दो बार महामंत्री, दो बार उपाध्यक्ष, पूर्व मीडिया प्रभारी और प्रवक्ता।
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अमर पाल मौर्य – दो बार मंत्री, दो बार महामंत्री, रायबरेली चुनाव हारने के बाद राज्यसभा भेजे गए।
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गोविंद नारायण शुक्ल – तीन अध्यक्षों के साथ महामंत्री, पूर्व प्रदेश मंत्री, वर्तमान में एमएलसी।
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अन्य वरिष्ठ नेता – पंकज सिंह, अनूप गुप्ता, सलिल विश्नोई, कांता कर्दम आदि।
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर
भाजपा का लक्ष्य कार्यकारिणी में एससी और ओबीसी को अधिक प्रतिनिधित्व देना है। इसके अलावा, पूर्वांचल से ज्यादातर बड़े नेता होने के कारण, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नेताओं को अधिक स्थान देकर संतुलन साधने की योजना है। जिलास्तरीय कार्यकारिणी में भी महिला पदाधिकारियों को विशेष महत्व दिया जाएगा।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि नई कार्यकारिणी में सक्रिय और नए नेताओं को प्राथमिकता देने के साथ संगठन को हर स्तर पर मजबूत बनाने की रणनीति बनाई जा रही है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी पूरी तरह तैयार हो।