
चाय की दुकान से अपराध के ‘अंडरवर्ल्ड’ तक का सफर तय करने वाला सीकर का कुख्यात शराब माफिया अनिल पांड्या दुबई में गिरफ्तार हो गया है। गुजरात ATS के सटीक इनपुट पर हुई इस कार्रवाई के बाद अब विदेश मंत्रालय उसे भारत लाने (प्रत्यर्पण) की तैयारी में जुट गया है।
चाय की दुकान से तस्करी के साम्राज्य तक
फतेहपुर (सीकर) के ‘खाजी का बास’ निवासी अनिल पांड्या की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। करियर की शुरुआत एक साधारण चाय की दुकान से करने वाले पांड्या का नाम पहली बार 2012 में बिरजू ठेकेदार हत्याकांड में उभरा। गिरफ्तारी हुई, लेकिन वह सांचौर जेल से फरार हो गया। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और बड़े सिंडिकेट के साथ मिलकर गुजरात और हरियाणा में शराब तस्करी का एक अभेद्य जाल बिछा दिया।
अपराध की लंबी ‘कुंडली’
सीकर एसपी प्रवीण नायक नूनावत के अनुसार, पांड्या पर अकेले सीकर जिले में 39 मुकदमे दर्ज हैं। गुजरात में शराबबंदी के बावजूद उसने करोड़ों का अवैध नेटवर्क खड़ा कर रखा था। वह केवल शराब तस्करी ही नहीं, बल्कि जमीनों पर अवैध कब्जे और वसूली में भी सक्रिय था। उसके खिलाफ पहले ही लुकआउट नोटिस जारी हो चुका था।
दुबई में भी नहीं बच पाया पांड्या
तौफीक नजीर खान और जगदीश प्रसाद जैसे गुर्गों की मदद से विदेशों में बैठकर अपना नेटवर्क चलाने वाला पांड्या खुद को सुरक्षित समझ रहा था। लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों और गुजरात ATS की घेराबंदी ने उसके साम्राज्य को ध्वस्त कर दिया। अब उसका भारत लाना तय है, जहाँ राजस्थान और गुजरात पुलिस उससे तस्करी के गहरे राज उगलवाने के लिए बेताब है।