
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन किशोरियों की दुखद मौत ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। टीला मोड़ थाना क्षेत्र की भारत सिटी सोसायटी में रहने वाली 12, 14 और 16 साल की तीन बहनों ने अपनी नौवीं मंजिल की बालकनी से कूदकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस के अनुसार, तीनों बहनें कोरियन टीवी ड्रामा और K-pop की दीवानी थीं। इतना ही नहीं, वे खुद को कोरियाई मानने लगी थीं और अपने माता-पिता से कहती थीं, “आप लोग भारतीय हैं और हम कोरियाई।” जब परिवार ने उनकी फोन और इंटरनेट की सुविधा सीमित की, तो तीनों नाराज हो गईं और रात के दो बजे अपने कमरे में बंद होकर यह कदम उठाया।
पुलिस का कहना है कि तीनों कोरियन कल्चर से दूरी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं, जबकि पिता का कहना है कि बच्चों की इस स्थिति के पीछे कोरियन गेम्स और मोबाइल का प्रभाव था। परिवार में दो पत्नियां और कुल पांच बच्चे हैं, इनमें से तीन कूदने वाली बेटियां हैं। कोविड के बाद से तीनों बहनें स्कूल नहीं जा रही थीं और पढ़ाई में मन नहीं लगता था।
आठ पेज का सुसाइड नोट:
पुलिस को तीनों के कमरे से आठ पेज का सुसाइड नोट मिला। नोट में लिखा था कि पिता, आप हमें कोरियन कल्चर से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। पहले पन्ने का हेडर ‘True Life Story’ (सच्ची जीवन कथा) है। नोट में बहनें अपने पिता से माफी मांगती नजर आईं और अपने दर्द को व्यक्त करती हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है:
संपादकीय बोर्ड का कहना है कि आत्महत्या से जुड़ी खबरों को आमतौर पर बड़े डिस्प्ले में नहीं दिखाया जाता। लेकिन इस घटना ने बच्चों और पैरंट्स के बीच संवादहीनता, मोबाइल और गेम्स की लत और मानसिक स्वास्थ्य जैसी गंभीर चिंताओं को उजागर किया है।
यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अनजाने में बच्चों को स्क्रीन और डिजिटल दुनिया में इतना उलझा चुके हैं कि वे वास्तविक जीवन और परिवार से कटकर अपनी पहचान कहीं और तलाशने लगे। माता-पिता और बच्चों के बीच सकारात्मक संवाद और समझ बनाने की आवश्यकता अब पहले से कहीं अधिक है।
गाजियाबाद की यह घटना सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि आज के डिजिटल युग में हर माता-पिता के लिए चेतावनी भी है।