Wednesday, February 4

टीचर की बेटी से बनी राष्ट्रपति की पहली महिला ADC: 7वीं क्लास में ठाना था – सेना में जाना है!

हरियाणा के छोटे से गांव से राष्ट्रपति भवन तक का सफर आसान नहीं होता। फिर भी यशस्वी सोलंकी ने 7वीं क्लास में जो सपना देखा था – सेना की वर्दी पहनने का – उसे सच कर दिखाया। आज वह भारत की पहली महिला ADC (एड-डी-कैंप) बन गई हैं।

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सरकारी स्कूल में टीचर हैं पिता

यशस्वी सोलंकी हरियाणा के चरखी दादरी जिले की रहने वाली हैं। उनके पिता सरकारी स्कूल में टीचर हैं और मां गृहिणी। छोटे गांव से पढ़ाई पूरी करने के बाद यशस्वी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से आगे की पढ़ाई की।

7वीं क्लास में ठाना – सेना में जाना है

यशस्वी का लक्ष्य बहुत छोटी उम्र में तय हो गया था। 7वीं क्लास में उन्होंने ठान लिया कि उन्हें सेना की वर्दी पहननी है। यह सपना तब जागा जब उन्होंने स्कूल के गणतंत्र दिवस प्रोग्राम में पहली बार इंडियन एयर फोर्स की वर्दी देखी और एक पायलट से प्रेरणा ली।

NDA एग्जाम क्रैक कर इंडियन नेवी ज्वॉइन की

साल 2012 में यशस्वी ने UPSC का नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) एग्जाम क्रैक किया और शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत इंडियन नेवी की लॉजिस्टिक ब्रांच ज्वॉइन की। इस क्षेत्र में योजना बनाने और शांत लीडरशिप की जरूरत होती है।

टफ ओरिएंटेशन के बाद बनी राष्ट्रपति की ADC

9 मई 2025 को यशस्वी सोलंकी ने राष्ट्रपति की ADC के रूप में पद संभाला। यह पद पाने के लिए उन्हें राष्ट्रपति भवन में 15 दिनों का टफ ओरिएंटेशन पास करना पड़ा। इस दौरान उनकी शारीरिक क्षमता, बुद्धिमत्ता और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की योग्यता परखने के लिए राष्ट्रपति ने खुद उनका इंटरव्यू लिया।

स्पोर्ट्स और फिटनेस

यशस्वी पहले जिला स्तर की बैडमिंटन और वॉलीबॉल खिलाड़ी रह चुकी हैं। महिला ADC के चयन के लिए आवश्यक ऊंचाई 173 सेमी और फिटनेस के मानदंड पर यशस्वी खरी उतरीं।

राष्ट्रपति के ADC क्या करते हैं?

राष्ट्रपति के पास आमतौर पर 5 ADC होते हैं – तीन आर्मी से, एक नेवी से और एक एयरफोर्स से। ADC राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों के बीच ब्रिज की तरह काम करते हैं। ये अधिकारिक काम, प्रोटोकॉल ड्यूटी, मीटिंग्स और सेरेमोनियल फंक्शन में मदद करते हैं। साथ ही राष्ट्रपति के डेली शेड्यूल और हाई-लेवल मीटिंग्स को भी मैनेज करते हैं और सभी नियमों एवं फॉर्मेलिटीज का पालन सुनिश्चित करते हैं।

यशस्वी सोलंकी की यह सफलता कहानी देश की अनगिनत बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

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