
ओलंपियन और ‘केतली पहलवान’ के नाम से मशहूर दीपक पूनिया ने बहादुरगढ़ के हिल्टन रिजॉर्ट में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अपनी लंबी प्रेम कहानी को शादी के बंधन में बदल दिया। उन्होंने पिता के मित्र की बेटी शिवानी के साथ सात फेरे लेकर जीवन के नए अध्याय की शुरुआत की।
दीपक की दुल्हन शिवानी झज्जर जिले के गांव निलोठी की रहने वाली हैं। उन्होंने रोहतक के जाट कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स में एमए किया है और बीएड की डिग्री भी हासिल की है। वर्तमान में वह एमएड और UPSC की तैयारी कर रही हैं। दीपक के पिता सुभाष पूनिया ने कहा, “शिवानी हमारी बहू ही नहीं, बेटी जैसी है। उसे जो भी पढ़ना है, करने दें।”
दीपक और शिवानी की सगाई 8 सितंबर 2025 को हुई थी। शादी से एक दिन पहले 2 फरवरी को झज्जर के धनखड़ फॉर्म हाउस में लग्न टीके का कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें दीपक ने मात्र एक रुपए का चांदी का सिक्का स्वीकार किया। शादी के दिन शाम करीब साढ़े चार बजे बारात छारा गांव से निकलकर रिजॉर्ट पहुँची, जहां आगे की रस्में संपन्न हुईं।
केतली पहलवान दीपक की कहानी
दीपक पूनिया का जन्म 19 मई 1999 को झज्जर जिले के छारा गांव में हुआ। उनके पिता भी स्थानीय स्तर के पहलवान रहे हैं। महज पांच साल की उम्र में अखाड़े में दाखिल होने के बाद उन्हें “केतली पहलवान” का उपनाम मिला, जब उन्होंने दूध पीते-पीते पूरी केतली खाली कर दी थी।
दीपक ने अपने करियर में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। टोक्यो ओलंपिक 2021 में ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में मामूली अंतर से हारने के बावजूद, उन्होंने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल और 2022 एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। वे भारतीय सेना में जूनियर कमीशंड अधिकारी (JCO) हैं और 86 किलोग्राम भार वर्ग में फ्रीस्टाइल कुश्ती में खेलते हैं।
PWL को छोड़ा शादी के लिए
दीपक को प्रो रेसलिंग लीग (PWL) में महाराष्ट्र की टीम से ग्रेड ए का दर्जा मिला था और बेस प्राइस 12 लाख रुपए रखा गया था। हालांकि, शादी के कारण उन्होंने यह अवसर नहीं लिया।
शिवानी से खास जान-पहचान
शिवानी के पिता अनूप सिंह प्रॉपर्टी डीलर हैं। दीपक अखाड़े में प्रैक्टिस के दौरान उनसे मिले और 2020 में दोनों परिवारों में दोस्ती हुई। जब रिश्ते प्रस्ताव आए, तो दोनों परिवारों ने खुशी-खुशी इसे मंजूर कर लिया।
दीपक और शिवानी की जोड़ी न केवल परिवारों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई है।