Wednesday, February 4

साफ हवा पर बजट में कटौती, दिल्ली-एनसीआर के लिए बढ़ा खतरा: विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई शहरों में लगातार गंभीर होती जा रही वायु प्रदूषण की समस्या को लेकर इस बार के आम बजट ने निराश किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण जैसे अहम मुद्दे पर बजट में कटौती एक बड़ी चूक है, जो आने वाले समय में सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को और गहरा कर सकती है।

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केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के लिए 1091 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान 1300 करोड़ रुपये से 209 करोड़ रुपये कम है। बजट में इस कटौती को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों और जलवायु कार्यकर्ताओं ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिस समय प्रदूषण के कारण बीमारियों और मौतों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, उसी समय फंड में कमी चिंता का विषय है। इतना ही नहीं, कई योजनाओं में पहले से उपलब्ध राशि का भी पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।

एनसीएपी 2.0 पर भी अनिश्चितता

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुमिता रायचौधरी ने कहा कि बजट में कमी से सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की आशंका और बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि एनसीएपी 2.0 का दायरा बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन बजट में वृद्धि न होने और 16वें वित्त आयोग से मिलने वाले अतिरिक्त अनुदान की अनिश्चितता के कारण योजनाओं पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस बजट में प्रदूषण नियंत्रण की बजाय इंडस्ट्री और ऊर्जा क्षेत्र पर अधिक ध्यान दिया गया है।

सरकार की प्राथमिकता में नहीं प्रदूषण नियंत्रण?

एनवायरोकैटलिस्ट के फाउंडर सुनील दहिया ने कहा कि बजट यह संकेत देता है कि प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को नियंत्रित करना सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। उन्होंने बताया कि 82 नॉन-अटेनमेंट शहरों के लिए एनसीएपी का वास्तविक बजट पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से भी कम कर दिया गया है।

सुनील दहिया ने यह भी कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए कोई नया कार्यक्रम शुरू नहीं किया गया है और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए भी कोई विशेष बजट प्रावधान नहीं किया गया। अब उम्मीदें 16वें वित्त आयोग से मिलने वाली सहायता पर टिकी हैं।

दिल्ली-एनसीआर के लिए ठोस रोडमैप की कमी

क्लाइमेट ट्रेंड की डायरेक्टर आरती खोसला ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने, एनसीएपी 2.0 को मजबूत बनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने हेतु स्पष्ट बजटीय प्रावधान जरूरी था, लेकिन इस दिशा में बजट कमजोर साबित हुआ है।

स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा प्रदूषण

विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में हर साल वायु प्रदूषण के कारण हजारों लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में बजट में कटौती से प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं की गति धीमी हो सकती है, जिसका असर सीधे जनता की सेहत पर पड़ेगा।

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