Saturday, January 31

गुजारा भत्ता वसूली के लिए पति की गिरफ्तारी नहीं होगी, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

 

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प्रयागराज, 31 जनवरी 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में स्पष्ट किया है कि पत्नी को गुजारा भत्ता न देने के कारण पति की गिरफ्तारी अवैध होगी। कोर्ट ने कहा कि परिवार न्यायालय द्वारा ऐसे गिरफ्तारी वारंट जारी करना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन भी है।

 

न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए छीना नहीं जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गुजारा भत्ते की वसूली केवल दंड प्रक्रिया संहिता, सिविल प्रक्रिया संहिता और परिवार अदालत कानून के तहत कानूनी प्रक्रिया अपनाकर ही की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के रजनेश बनाम नेहा मामले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि भत्ते की वसूली के लिए गिरफ्तारी का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।

 

कोर्ट ने यह भी कहा कि जो व्यक्ति मेंटेनेंस देने का दायित्व रखता है, उसे अपराधी नहीं माना जा सकता। अदालतों को भत्ते की वसूली में अपनी कार्रवाई करते समय व्यक्ति की गरिमा और व्यक्तिगत आजादी का सम्मान करना अनिवार्य है।

 

यह फैसला मोहम्मद शाहजाद और शाजिया खान के बीच चल रहे मामले में आया। परिवार अदालत अलीगढ़ ने पति को बीबी शाजिया खान को 10,000 रुपये और उनके बच्चे को 5,000 रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो अदालत ने धारा 128 के तहत भत्ता वसूली के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया। हाईकोर्ट ने इसे अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया और कहा कि कोर्ट वेतन कुर्की या सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत अन्य कानूनी उपाय कर सकती है, लेकिन गिरफ्तारी कर वसूली नहीं की जा सकती।

 

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि गुजारा भत्ता न देना कानूनी रूप से पति का दायित्व है, लेकिन यह अपराध नहीं है, और इसलिए गिरफ्तारी का कोई आधार नहीं बनता।

 

 

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