Tuesday, January 27

पाकिस्तान तक गूंजेगा दरभंगा राज का नाम: राजेश्वर और कपिलेश्वर सिंह संभालेंगे 108 मंदिरों के पुनरुद्धार की कमान

दरभंगा। मिथिलांचल की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय की शुरुआत हो गई है। दरभंगा राज परिवार की संपत्तियों से जुड़े 47 वर्षों पुराने विवाद के निपटारे और महारानी अधिरानी कामसुंदरी साहिबा के निधन के बाद, कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास ट्रस्ट की कमान अब युवराज राजेश्वर सिंह और कपिलेश्वर सिंह के हाथों में आ गई है। दोनों युवराजों ने ट्रस्ट के अधीन भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में स्थित कुल 108 मंदिरों के पुनरुद्धार का संकल्प लिया है।

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सितंबर 2025 में दरभंगा सिविल कोर्ट द्वारा दोनों भाइयों को वैध ट्रस्टी घोषित किए जाने के बाद, 12 जनवरी 2026 को औपचारिक रूप से उन्होंने ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभाली। पदभार ग्रहण करने के उपरांत युवराजों ने दरभंगा स्थित मां श्यामा, मां तारा और कंकाली माता के दरबार में पूजा-अर्चना कर अपनी योजना की शुरुआत की।

सरहदों के पार फैली दरभंगा राज की विरासत

युवराज कपिलेश्वर सिंह ने बताया कि महाराजा कामेश्वर सिंह द्वारा स्थापित यह धार्मिक न्यास सनातन धर्म की रक्षा और मंदिर परंपरा के संरक्षण के उद्देश्य से गठित किया गया था। ट्रस्ट के अंतर्गत आने वाले मंदिर केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी स्थित हैं। वाराणसी में ही ट्रस्ट के चार प्रमुख मंदिर हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व काल में कई राजा-महाराजाओं ने अपने मंदिरों और ठाकुरबाड़ियों की देखरेख में असमर्थता के चलते उन्हें दरभंगा महाराज को सौंप दिया था। अब इन सभी धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और संरक्षण की विस्तृत योजना बनाई जा रही है।

माधेश्वरनाथ परिसर बनेगा धार्मिक और पर्यटन केंद्र

ट्रस्ट का पहला बड़ा लक्ष्य दरभंगा स्थित माधेश्वरनाथ परिसर को एक भव्य धार्मिक हब के रूप में विकसित करना है। तारा मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि अब परिसर में पार्किंग, स्वच्छता और आधारभूत संरचना को मजबूत किया जा रहा है। युवराजों की योजना है कि इस परिसर को मिथिलांचल के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल किया जाए, जहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों। इसके साथ ही रामबाग और गोसावनी घर परिसर के सौंदर्यीकरण को भी प्राथमिकता दी गई है।

पुजारियों के मानदेय से लेकर संपत्तियों तक होगा सुधार

युवराज राजेश्वर सिंह ने स्वीकार किया कि ट्रस्ट की संपत्तियों के प्रबंधन में वर्षों से कुछ कमियां रही हैं। अमेरिका में लगभग तीन दशक बिताने के बाद वे अब स्थायी रूप से इस दायित्व को निभाने के लिए लौट आए हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों में कार्यरत पुजारियों का मानदेय वर्तमान महंगाई के अनुरूप नहीं है, जिसे सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही ट्रस्ट की भूमि, तालाबों और संपत्तियों पर हुए अवैध कब्जों को कानूनी प्रक्रिया के तहत मुक्त कराया जाएगा, ताकि ट्रस्ट की आय में वृद्धि हो और मंदिरों का संचालन सुचारू रूप से हो सके।

विरासत को मूल वैभव में लौटाने का संकल्प

पारिवारिक संस्कारों के केंद्र रहे गोसावनी घर को लेकर युवराज राजेश्वर सिंह भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि बचपन के कई संस्कार और पारिवारिक स्मृतियां इसी परिसर से जुड़ी हैं। जर्जर हो चुके इस ऐतिहासिक भवन के जीर्णोद्धार का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। लक्ष्य यह है कि दरभंगा महाराज के समय की भव्यता को आधुनिक तकनीक और संरक्षण उपायों के साथ पुनः स्थापित किया जाए। पुताई, सीढ़ियों की मरम्मत और समग्र सौंदर्यीकरण के माध्यम से इस ऐतिहासिक धरोहर को नया जीवन दिया जाएगा।

युवराजों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार नहीं, बल्कि दरभंगा राज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना है।

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