
नई दिल्ली: सरकार ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने की तैयारी कर रही है। इसी सिलसिले में हाल ही में गृह मंत्रालय में एक हाई-लेवल बैठक हुई, जिसमें इस राष्ट्रीय गीत के गायन नियम और प्रोटोकॉल पर चर्चा की गई।
बैठक में क्या तय हुआ?
वरिष्ठ अधिकारियों ने विचार किया कि ‘वंदे मातरम’ को कब और कैसे गाया जाना चाहिए।
यह भी तय किया कि क्या इसे राष्ट्रगान के साथ या स्वतंत्र रूप से गाया जा सकता है।
अपमान या अनादर की स्थिति में कानूनी प्रावधान लागू किए जाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
ऐतिहासिक और संवैधानिक संदर्भ
‘वंदे मातरम’ को 1870 के दशक में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। यह गीत 1905-08 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान नारा बन गया और स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा।
हालांकि, राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को संपूर्ण संवैधानिक और वैधानिक संरक्षण प्राप्त है, जबकि ‘वंदे मातरम’ को ऐसा कोई संरक्षण नहीं मिला है। संविधान के अनुच्छेद 51A(a) के तहत नागरिकों का कर्तव्य है कि वे राष्ट्रगान का सम्मान करें। वहीं, राष्ट्रगान के गायन और उपयोग को गृह मंत्रालय द्वारा जारी कार्यकारी आदेशों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
अदालत और कानून की भूमिका
हाल के वर्षों में कई याचिकाएं दायर हुई हैं, जिसमें राष्ट्रीय गीत के गायन के लिए ढांचा तैयार करने की मांग की गई।
1971 के राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम के तहत राष्ट्रगान के अपमान पर दंड का प्रावधान है, लेकिन ‘वंदे मातरम’ के लिए ऐसा कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है।
2022 में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ‘वंदे मातरम’ के लिए अभी तक कोई स्पष्ट निर्देश या नियम जारी नहीं किए गए हैं।
बीजेपी का कदम
सरकार का यह प्रयास ‘वंदे मातरम’ के सम्मान को बढ़ाने और इसे राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में मजबूत करने का हिस्सा है। इसके तहत साल भर चलने वाले उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। पहला चरण नवंबर में पूरा हो चुका है, दूसरा चरण इसी महीने, तीसरा अगस्त 2026 में और चौथा नवंबर 2026 में होगा।