Monday, January 19

जर्मनी संग रिश्ते ले रहे नया मोड़, भारत को मिल सकती हैं आधुनिक टेक्नोलॉजी

 

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नई दिल्ली: जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की हाल ही में भारत यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों में नई दिशा का संकेत दिया है। यह दौरा भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 साल और राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के अवसर पर हुआ। अब व्यापार और निवेश से बढ़कर, दोनों देशों का रिश्ता मजबूत रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहा है।

 

महत्वपूर्ण समझौते और रक्षा सहयोग:

इस दौरे में कुल 19 अहम समझौतों पर सहमति बनी। सबसे महत्वपूर्ण था डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन, जिससे भारत और जर्मनी मिलकर हथियारों और रक्षा उपकरणों का विकास करेंगे। इस कदम से निर्यात आसान होगा और जर्मनी की अत्याधुनिक रक्षा तकनीक भारत तक पहुंचेगी। खासतौर पर 6 आधुनिक पनडुब्बियों की अरबों डॉलर की परियोजना भी इस सहयोग का हिस्सा है।

 

आर्थिक और तकनीकी सहयोग:

दोनों नेताओं ने वैश्विक सप्लाई चेन को विविध बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके लिए एक CEO फोरम बनाया गया, ताकि सरकारी निवेश पर निर्णय लेने वाली समितियों में बिजनेस लीडर्स की सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो। समझौते सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और टेलीकम्युनिकेशन क्षेत्र में किए गए। जर्मन चांसलर ने उम्मीद जताई कि इस महीने के अंत तक भारत और EU के बीच FTA फाइनल हो सकता है।

 

ग्रीन और सतत विकास में सहयोग:

जर्मनी ने 1.24 अरब यूरो की अतिरिक्त मदद देने का वादा किया है। इसका उपयोग ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक वाहन और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में किया जाएगा। भारत की AM Green और जर्मनी की Uniper के बीच ग्रीन अमोनिया पर समझौता भी महत्वपूर्ण है।

 

सुविधाओं और शिक्षा में विस्तार:

इस दौरे में दो बड़ी घोषणाएं हुईं:

 

  1. बीजा फ्री ट्रांजिट – अब भारतीय पासपोर्ट धारक जर्मनी के एयरपोर्ट से बिना वीजा के ट्रांजिट कर सकेंगे।
  2. शिक्षा में विस्तार – जर्मनी के विश्वविद्यालय भारत में कैंपस खोलेंगे।

 

इसके अलावा, जर्मनी में भारतीय हेल्थकेयर और आईटी पेशेवरों को नए अवसर मिलेंगे।

 

वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव:

इस दौरे की पृष्ठभूमि में पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका तनाव, यमन में सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव और गाजा की अस्थिरता शामिल हैं। भारत और जर्मनी, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन पर नजर रखते हुए, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को महत्व दे रहे हैं।

 

भविष्य की दिशा:

भारत और यूरोप, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए साझेदार बनकर उभर रहे हैं। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, निवेश की सुरक्षा और मजबूत सप्लाई चेन में दोनों पक्षों की दिलचस्पी, आने वाले समय में इस रिश्ते को और मजबूत करेगी।

 

(लेखक: हर्षवी पंत, लंदन के किंग्स कॉलेज में प्रोफेसर)

 

 

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