
नई दिल्ली: कई माता-पिता अपने बच्चों की अत्यधिक सक्रियता से परेशान रहते हैं। बच्चे पढ़ाई के समय एक जगह बैठने की बजाय लगातार कूदते-फांदते रहते हैं। चाइल्ड साइकोलॉजी एक्सपर्ट श्वेता गांधी के अनुसार, बच्चों की यह मूवमेंट उनकी विकास प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे रोकना गलत हो सकता है।
लड़कों का दिमाग मूवमेंट से सीखता है:
श्वेता गांधी कहती हैं कि लड़कों का दिमाग चीजों को मूवमेंट के जरिए समझता और सीखता है। कूदना, दौड़ना या चढ़ना उनके ब्रेन बैलेंस, बॉडी अवेयरनेस और इमोशनल रेग्युलेशन के लिए जरूरी है।
एक्सपर्ट का आसान तरीका:
श्वेता गांधी के अनुसार, हाईली एक्टिव बच्चों की ऊर्जा को सही दिशा में चैनलाइज करने के लिए उन्हें भारी एक्टिविटी करवाएं। उदाहरण के लिए, खाने से पहले 10 फ्रॉग जंप या 10 जंपिंग जैक्स करवा सकते हैं। इससे उनकी एनर्जी सही तरीके से रिलीज होती है और नर्वस सिस्टम शांत होता है।
मूवमेंट को रोकना नहीं, गाइड करना जरूरी:
पेरेंट्स को बच्चों की मूवमेंट को डिस्ट्रैक्शन समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। उन्हें जोर-जबर्दस्ती शांत बैठने के लिए कहना गलत है। इसके बजाय, उनकी ऊर्जा को सही दिशा में गाइड करें। श्वेता कहती हैं कि मूवमेंट को रोकने से बच्चों की ब्रेन ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
निष्कर्ष:
बच्चों की एक्टिविटी को रोकने की बजाय उन्हें नियंत्रित और गाइड करना फोकस और शांति लाने का सबसे असरदार तरीका है। यह तरीका न केवल उनकी ऊर्जा सही दिशा में लगाता है, बल्कि पढ़ाई और मानसिक विकास में भी मदद करता है।