
पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में माघी मेले का धार्मिक रंग इस बार सियासी सरगर्मी में भी बदल गया। 2027 के विधानसभा चुनावों का झलकियां इस पंथक मंच पर दिखाई दीं, जहां प्रमुख राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर हमले किए और खुद को बेहतर विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश की।
बीजेपी ने पहली बार माघी मेले में राजनीतिक सम्मेलन किया। केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी झंडों वाली सरकारी बसों का रैलियों में इस्तेमाल हुआ और एक आरटीओ अधिकारी को सहयोग न करने पर निलंबित किया गया। बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से सार्वजनिक माफी और वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच की मांग की।
बीजेपी के पंजाब अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मुख्यमंत्री मान पर दिल्ली नेतृत्व के दबाव में पंजाब के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया और कांग्रेस पर आंतरिक कलह, भ्रष्टाचार और पहचान की राजनीति के लिए हमला बोला।
वहीं, आम आदमी पार्टी के सम्मेलन में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विपक्ष पर निजी हमलों की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने घोषणा की कि सभी नागरिकों के लिए 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर और महिलाओं को 1,000 रुपये मासिक सहायता जल्द लागू की जाएगी। मान ने शिरोमणि अकाली दल पर भी धर्म और बेअदबी के मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भी अपनी ओर से आप सरकार पर झूठे वादों और पंजाब को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भर्तियों में बाहरी लोगों को तरजीह दी गई और महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता अब तक लागू नहीं हुई। बादल ने आरोप लगाया कि सरकार का संचालन दिल्ली से किया जा रहा है।
कांग्रेस ने इस बार कोई सम्मेलन आयोजित नहीं किया। पार्टी ने 2017 में अकाल तख्त द्वारा धार्मिक अवसरों पर राजनीतिक रैलियों से परहेज के निर्देशों का हवाला देते हुए अन्य दलों के सम्मेलन पर स्पष्टीकरण मांगा।
माघी मेला: परंपरागत रूप से सिख समुदाय के धार्मिक और सामाजिक मुद्दों का मंच रहा है, लेकिन इस बार इसे पंजाब की राजनीतिक सरगर्मी का प्रमुख केंद्र भी बनाया गया।