
कानपुर: रेजेंसी हॉस्पिटल में डॉ. शशांक त्रिपाठी और उनकी टीम ने नेपाल की 22 वर्षीय युवती का एक बेहद दुर्लभ जन्मजात हृदय रोग सफलतापूर्वक इलाज किया। युवती को जन्म से ही पेरिडक्टल कोआर्कटेशन ऑफ एओर्टा, राइट-साइडेड एओर्टिक आर्च और एबेरेंट सुप्रा-एओर्टिक वेसल्स जैसी असामान्य धमनी संरचना की समस्या थी। यह बीमारी बेहद कम लोगों में पाई जाती है।
सामान्य लक्षणों में छुपी गंभीरता
मरीज को लंबे समय से तेज सिरदर्द, सिर में भारीपन और शरीर में कमजोरी की शिकायत थी। जांच के दौरान डॉक्टरों ने देखा कि उसकी गर्दन में नब्ज सामान्य थी, लेकिन हाथ-पैरों की नब्ज गायब थी। इससे पता चला कि शरीर की मुख्य धमनी (एओर्टा) में गंभीर रुकावट है और निचले अंगों तक पर्याप्त खून नहीं पहुँच पा रहा था।
एडवांस जांच में सामने आई जटिलता
सीटी एंजियोग्राफी में मरीज की रक्त वाहिकाओं की असामान्य बनावट सामने आई। इस जटिल संरचना के कारण सामान्य सर्जरी या कैथेटर के जरिए इलाज संभव नहीं था।
दुनिया में गिने-चुने मामलों में अपनाई गई सर्जरी
डॉ. त्रिपाठी और उनकी टीम ने एक रेयर बायपास सर्जरी का निर्णय लिया। इसमें छाती से पेट तक ब्लड फ्लो के लिए नया रास्ता बनाया गया और पेट में ग्राफ्ट लगाकर रक्त संचार को सुरक्षित किया गया। यह तकनीक दुनियाभर में बहुत कम मामलों में ही अपनाई जाती है।
सर्जरी के बाद मिली सफलता
सर्जरी के बाद मरीज के हाथ और पैरों में नब्ज सामान्य हो गई। ब्लड प्रेशर स्थिर हुआ और सिरदर्द, कमजोरी जैसे सभी लक्षण समाप्त हो गए। मरीज बिना किसी जटिलता के रिकवर हुई और चौथे दिन अस्पताल से सुरक्षित छुट्टी पा गई।
दुर्लभ बीमारियों में भी उम्मीद की किरण
यह केस साबित करता है कि सही समय पर जांच, एडवांस सर्जिकल तकनीक और व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्लानिंग से सबसे जटिल और दुर्लभ जन्मजात हृदय रोगों का भी सफल इलाज संभव है। यह सफलता न सिर्फ मरीज के लिए नई जिंदगी लेकर आई बल्कि मेडिकल साइंस में विशेषज्ञता और नवाचार की ताकत को भी दर्शाती है।