
जयपुर: भारतीय सेना के 78वें स्थापना दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित आर्मी डे परेड 2026 में न सिर्फ शौर्य और अनुशासन का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला, बल्कि वर्ष 2047 तक ‘फ्यूचर रेडी’ भारतीय सेना की मारक क्षमता कैसी होगी, इसकी स्पष्ट झलक भी सामने आई।
सेना दिवस परेड में यह संदेश साफ दिखा कि भारतीय सेना तेज़ी से आत्मनिर्भर, तकनीक-संपन्न और बहुआयामी युद्ध के लिए तैयार बल के रूप में आगे बढ़ रही है। थार के रेगिस्तान से लेकर हिमालय की ऊंची चोटियों तक, सेना हर मोर्चे पर पूरी ताकत के साथ तैनात है।
स्वदेशी हथियारों से बढ़ी सेना की ताकत
भारतीय सेना की मारक क्षमता में स्वदेशी हथियारों और आधुनिक प्लेटफॉर्म्स ने बड़ा इजाफा किया है। अर्जुन टैंक, टी-90, के-9 वज्र, अग्नि, ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल प्रणालियों ने सेना को वह सामर्थ्य दी है, जिससे वह न केवल सीमाओं पर बल्कि दूरस्थ लक्ष्यों पर भी सटीक और घातक प्रहार करने में सक्षम हो चुकी है।
तीसरी पीढ़ी का टैंक ‘भीष्म’ बना आकर्षण
परेड में तीसरी पीढ़ी का एडवांस टैंक भीष्म (टी-90) विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
125 एमएम की शक्तिशाली तोप से लैस
चार प्रकार के गोले दागने में सक्षम
5 किलोमीटर तक दुश्मन को निशाना बनाने वाली मशीनगन
रात में भी समान रूप से प्रभावी
46 टन वजन के बावजूद 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार
यह टैंक दुश्मनों के लिए काल साबित होने की क्षमता रखता है और सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहा है।
‘फ्यूचर रेडी’ सेना की स्पष्ट रणनीति
भारतीय सेना का लक्ष्य 2047 तक खुद को एक ऐसी आधुनिक, आत्मनिर्भर और तकनीक आधारित फोर्स में बदलना है, जो किसी भी प्रकार के युद्ध को निर्णायक रूप से जीत सके। इसी दिशा में अगस्त 2024 में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में थल, जल और वायु सेना के बीच ज्वाइंट ऑपरेशंस को और मजबूत करने की रणनीति तय की गई थी।
आर्मी डे परेड 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले वर्षों में भारतीय सेना सिर्फ संख्या में नहीं, बल्कि तकनीक, रणनीति और मारक क्षमता में भी विश्व की अग्रणी सेनाओं में शामिल होगी।