
नई दिल्ली: ईरान में जारी अशांति और भुगतान अटकने की स्थिति के कारण भारत के बासमती चावल के निर्यात में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। पिछले एक सप्ताह में बासमती चावल की कीमतें 5-7 रुपये प्रति किलो तक घट गई हैं। ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा बासमती चावल खरीदार है। इस संकट के कारण भारतीय निर्यातकों के करीब 2,000 करोड़ रुपये खतरे में हैं।
ईरानी अशांति और भुगतान अटकना
ईरान में पिछले साल भारत से लगभग 75 करोड़ डॉलर का चावल आयात हुआ था। लेकिन वर्तमान में देश में अशांति और संचार व्यवस्था ठप होने के कारण भुगतान अटक गए हैं। इसके चलते ईरान के बंदरगाहों और भारत के मुंद्रा जैसे बंदरगाहों पर चावल का भारी स्टॉक जमा हो गया है। इस साल भारत में चावल की बंपर फसल हुई है, जिससे निर्यातकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
चावल की कीमतों में 30-40% तक गिरावट का खतरा
इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREXF) ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट जारी रहा, तो बासमती चावल की कीमतों में 30-40 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। निर्यातकों ने बंदरगाहों पर माल भेजना रोक दिया है। फेडरेशन ने कहा, “इस संकट से पंजाब और हरियाणा के किसान, मिल मालिक और निर्यातक प्रभावित हो सकते हैं। यह वित्तीय वर्ष में भारत के बासमती चावल निर्यात को नुकसान पहुंचा सकता है।”
ईरानी मुद्रा और अमेरिकी टैरिफ ने स्थिति बिगाड़ी
ईरान की गिरती मुद्रा भी भारत के लिए चिंता का विषय बन गई है। वर्तमान सरकार के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान से जुड़े व्यापार पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा ने व्यापार को और जटिल बना दिया है। रियाल की गिरती वैल्यू के कारण ईरान में महंगाई बढ़ गई है और खाद्य आयात पर सब्सिडी वापस ली गई है, जिससे ईरानी खरीदारों को भुगतान करने में दिक्कत हो रही है।
सप्लाई चेन पर असर
फेडरेशन ने बताया कि विदेशी मुद्रा की कमी और भुगतान में देरी के कारण भारत की सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका है। निर्यात की मांग कम होने से बासमती चावल की कीमतों पर दबाव बनेगा। छोटे और मध्यम निर्यातकों के लिए यह संकट नकदी की गंभीर समस्या पैदा कर सकता है, क्योंकि उन्होंने हाल ही में सरकारी योजनाओं के तहत सस्ता कर्ज लिया है। लगभग 1,500–2,000 करोड़ रुपये का भुगतान अटकने का खतरा है।
निष्कर्ष
ईरान का संकट न केवल भारतीय निर्यातकों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन रहा है, बल्कि पंजाब और हरियाणा के बासमती चावल किसानों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के सुधार और ईरानी भुगतान की समस्या सुलझने तक निर्यातक सतर्क रहेंगे।