Tuesday, January 13

मैं झुकेगा नहीं… टैरिफ को लेकर कोर्ट के खिलाफ जाने को तैयार ट्रंप, तैयार है ‘गेम 2 प्लान’

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अपने टैरिफ लगाने के फैसले पर अड़े हुए हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट 14 जनवरी को उनके ग्लोबल टैरिफ मामले में फैसला सुना सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के पक्ष में नहीं जाता, तो उन्होंने अपने गेम 2 प्लान’ के तहत वैकल्पिक कानूनी रास्ते अपनाने की तैयारी कर ली है।

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ट्रंप का दावा और चेतावनी

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल’ पर चेतावनी दी कि अगर सुप्रीम कोर्ट उनके टैरिफ को अवैध करार देता है तो अमेरिका को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। उनका कहना है कि इस फैसले से अमेरिका को सैकड़ों अरबों डॉलर का टैरिफ रिवर्स करना पड़ सकता है और निजी निवेशों से जुड़े दावे भी सामने आ सकते हैं।

किस कानून के तहत लगाया टैरिफ

ट्रंप ने यह कदम 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत उठाया था। इस कानून के तहत राष्ट्रपति आपातकाल की स्थिति में व्यापारिक टैरिफ लगा सकते हैं। नवंबर में हुई सुनवाई के दौरान जजों ने संदेह जताया था कि क्या यह कानून राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना वैश्विक टैरिफ लगाने की इजाजत देता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में ट्रंप के टैरिफ से लगभग 200 अरब डॉलर का अतिरिक्त रेवेन्यू अमेरिकी संघीय सरकार को मिला, जिसमें से आधे से अधिक IEEPA के तहत थे।

सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ गेम 2 प्लान

ट्रंप ने कहा है कि यदि सुप्रीम कोर्ट उनका पक्ष नहीं लेता, तो वे गेम 2 प्लान’ के तहत वैकल्पिक कानूनी रास्तों से टैरिफ को लागू करने की कोशिश करेंगे। हालांकि उन्होंने माना कि ये रास्ते धीमे और जटिल होंगे। निचली अदालतों ने पहले ही उनके प्रशासन के खिलाफ फैसला सुनाया था और अगस्त में एक संघीय अपीली अदालत ने यह ठहराया कि ट्रंप ने अपने आपातकालीन अधिकार का दुरुपयोग किया।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाता है तो यह उनके घरेलू और व्यापार नीति के मुख्य स्तंभों में बड़ा झटका होगा। इससे अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों जैसे यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, यूके और भारत के साथ रिश्तों पर भी असर पड़ेगा।

ट्रंप का ‘गेम 2 प्लान’ यह दर्शाता है कि वह अपने टैरिफ एजेंडे पर टिके रहने के लिए हर वैकल्पिक कानूनी और नीतिगत रास्ते पर विचार कर रहे हैं।

 

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