Saturday, January 10

दिल्ली में 80 साल के बुजुर्ग और पत्नी को 7 दिन तक रखा ‘डिजिटल अरेस्ट’ में, 96 लाख रुपये की ठगी का खुलासा

 

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नई दिल्ली: राजधानी में साइबर ठगों ने 80 साल के बुजुर्ग और उनकी पत्नी को 7 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 96 लाख रुपये की ठगी की घटना को अंजाम दिया। मामले में स्पेशल सेल की IFSO टीम ने प्राइवेट बैंक के दो अधिकारियों के साथ पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

 

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार आरोपियों में प्रदीप कुमार, नमन दीप मलिक, शशिकांत पटनायक, निलेश कुमार और चंदन कुमार शामिल हैं। ये आरोपी हरियाणा के हिसार, उड़ीसा के भुवनेश्वर और दिल्ली के सागरपुर व उत्तम नगर इलाके के रहने वाले हैं। पुलिस ने बताया कि दो बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से इन अपराधियों ने दिल्ली में बैंक अकाउंट खोला और साइबर फ्रॉड की योजना बनाई।

 

कैसे हुआ डिजिटल अरेस्ट

डीसीपी IFSO विनीत कुमार पांडे ने बताया कि आरोपियों ने बुजुर्ग दंपति को 7 दिन तक बंधक बनाकर रखा। ठग कभी उन्हें ट्राई का अधिकारी, कभी दिल्ली पुलिस और कभी सीबीआई का अधिकारी बता कर डराते रहे। आरोपियों ने बुजुर्ग और उनकी पत्नी को यह कहकर झांसा दिया कि उनका आधार और मोबाइल नंबर किसी गलत गतिविधि में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद उन्होंने 96 लाख रुपये की ठगी की। पीड़ितों ने अपनी जमा पूंजी, फिक्स डिपाजिट और अन्य रकम आरोपीयों को ट्रांसफर कर दी।

 

साइबर सर्विलांस से सुराग मिला

मामले की शिकायत 4 नवंबर को IFSO टीम के पास आई थी। एसीपी मनोज कुमार के नेतृत्व में सब-इंस्पेक्टर मुन्ना, हेड कांस्टेबल अजय, सुरेश, मोहित और आशीष की टीम ने बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर के आधार पर तकनीकी सर्विलांस कर जांच शुरू की। सबसे पहले हिसार, हरियाणा के प्रदीप कुमार का पता चला और उसके बाद उसके सहयोगी नमन दीप मलिक को गिरफ्तार किया गया।

 

बैंक अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई

पूछताछ में शशिकांत पटनायक का नाम सामने आया, जिसे भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद दो प्राइवेट बैंक अधिकारियों को भी पकड़ा गया, जिनकी मदद से दिल्ली में अकाउंट खोला गया था।

 

पुलिस ने बताया कि आरोपी कभी दिल्ली पुलिस, कभी सीबीआई, कभी कस्टम और अलग-अलग सरकारी विभागों के अधिकारी बनकर लोगों को टारगेट करते थे। इसके बाद मोटी रकम की ठगी करने के लिए डिजिटल अरेस्ट की वारदात अंजाम देते थे।

 

यह मामला साइबर ठगी और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की गंभीरता को उजागर करता है और पुलिस अब अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश में जुटी है।

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