Saturday, January 10

ग्रीनलैंड पर ट्रंप का नया दावा: क्या बैरन और डेनमार्क की राजकुमारी से होगी शादी? ग्रीनलैंड को दहेज में देने का खाका, अमेरिकी योजना पर विवाद

 

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की योजना में एक नया और विवादास्पद मोड़ आया है। ट्रंप समर्थकों के बीच चर्चा शुरू हो गई है कि उनके छोटे बेटे बैरन ट्रंप और डेनमार्क की राजकुमारी इसाबेला की शादी से ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाया जा सकता है। यह प्रस्ताव इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है और कुछ यूज़र्स इसे भारत के मुग़ल शासकों के दौर से जोड़कर देख रहे हैं, जब राजपूत राजाओं से विवाह के जरिए राज्यों को मुग़ल सल्तनत में समाहित किया जाता था।

 

ट्रंप का ग्रीनलैंड पर कब्जा लेने का इरादा

 

डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लेने के लिए हाल ही में फिर से बयानबाजी की है। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने इस तरह के अमेरिकी दावे को कड़ा विरोध किया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि ग्रीनलैंड का भविष्य डेनमार्क और ग्रीनलैंड ही तय करेंगे, और अमेरिका की दखलंदाजी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

 

बैरन-इसाबेला की शादी का “समाधान”

 

इंटरनेट पर ट्रंप के समर्थकों द्वारा उठाया गया एक विचार यह है कि यदि बैरन ट्रंप (19) और डेनमार्क की राजकुमारी इसाबेला (18) की शादी हो जाती है, तो ग्रीनलैंड को “दहेज” के रूप में अमेरिका को सौंपा जा सकता है। एक सोशल मीडिया यूज़र ने लिखा, “यह एक आसान डिप्लोमैटिक समाधान हो सकता है, जैसा कि इतिहास में मुगलों ने किया था, जब उन्होंने विवाह के जरिए राज्यों को अपने साम्राज्य में शामिल किया।” हालांकि, इस थ्योरी का कोई ठोस आधार नहीं है, और इसे सिर्फ कल्पना के तौर पर देखा जा रहा है।

 

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका का सख्त रुख

 

ग्रीनलैंड, जो वर्तमान में डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है, पर अमेरिका की वर्षों से नजर रही है। इस द्वीप में खनिज संसाधनों की भरमार है और यह आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, जिसे रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ट्रंप प्रशासन पहले भी ग्रीनलैंड को खरीदने की बात कर चुका है, लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने इसे सिरे से नकारा है।

 

डेनमार्क की कड़ी प्रतिक्रिया

 

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने स्पष्ट रूप से कहा कि “डेनमार्क का ग्रीनलैंड पर पूरी तरह से नियंत्रण है और यह अमेरिका का हिस्सा कभी नहीं बनेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर हमला किया, तो नाटो गठबंधन का सभी सदस्य देशों पर गहरा असर पड़ेगा, क्योंकि डेनमार्क नाटो का एक अहम सदस्य है।

 

वैश्विक दृष्टिकोण और विवाद

 

इस मामले को लेकर यूरोप में भी चिंता व्यक्त की जा रही है, खासकर नाटो और अमेरिका के सहयोगी देशों में। ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए डेनमार्क जिम्मेदार है, लेकिन इस विशाल क्षेत्र को सैन्य रूप से कवर करने के लिए उसके पास सीमित संसाधन हैं। ट्रंप के सहयोगी यह विचार बढ़ा रहे हैं कि ग्रीनलैंड को खरीदने की प्रक्रिया एक विकल्प हो सकती है, जैसा कि राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने 1946 में भी उठाया था।

 

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