
चीन के वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-कचरा) से सोना निकालने की एक नई और बेहद किफायती प्रक्रिया विकसित की है। इस नई तकनीक की मदद से सिर्फ 20 मिनट में पुराने मोबाइल फोन और घरेलू उपकरणों के सर्किट बोर्ड से 98 प्रतिशत सोना निकाला जा सकता है।
पुराने तरीके थे महंगे और खतरनाक
पारंपरिक सोना निकालने की प्रक्रियाओं में अक्सर साइनाइड जैसे जहरीले रसायनों का उपयोग होता है, जो न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बनते हैं।
नई तकनीक कैसे काम करती है
चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेस के तहत गुआंगज़ौ इंस्टीट्यूट ऑफ एनर्जी कन्वर्ज़न और साउथ चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने इसे विकसित किया है। यह सेल्फ–कैटेलिटिक लीचिंग मैकेनिज्म पर आधारित है। इसमें किसी भी तरह के कॉर्रोसिव रिएजेंट या एक्सटर्नल कैटलिस्ट की जरूरत नहीं होती।
प्रक्रिया का तरीका:
- पोटेशियम परऑक्सीमोनोसल्फेट (PMS) और पोटेशियम क्लोराइड (KCl) के घोल का इस्तेमाल किया जाता है।
- जब यह घोल सोने या पैलेडियम की सतह पर पड़ता है, तो धातु खुद ही कैटलिस्ट का काम करती है।
- PMS और क्लोराइड आयन सक्रिय होकर सिंगलेट ऑक्सीजन और हाइपोक्लोरस एसिड जैसे ऑक्सीडेंट उत्पन्न करते हैं।
- ये ऑक्सीडेंट धातु के परमाणुओं को तोड़ते हैं और क्लोराइड आयन उन्हें घोल में मिला देते हैं, जिससे आसानी से सोना निकाला जा सकता है।
अद्भुत परिणाम
- पुराने सीपीयू और पीसीबी से 98.2% सोना और 93.4% पैलेडियम निकाला जा सकता है।
- केवल 10 किलोग्राम ई-कचरे से लगभग 1.4 ग्राम सोना प्राप्त होता है।
- इसकी कुल लागत लगभग 72 अमेरिकी डॉलर होती है, जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में लगभग एक तिहाई कीमत है।
- यह प्रक्रिया पारंपरिक तकनीकों की तुलना में 62.5% कम ऊर्जा खर्च करती है।
ई–कचरे का बढ़ता संकट
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल लगभग 2.6 मिलियन टन ई-कचरा उत्पन्न होता है, और 2030 तक यह बढ़कर 82 मिलियन टन हो जाएगा। ई-कचरे में कंप्यूटर, मोबाइल फोन, बड़े घरेलू उपकरण और मेडिकल उपकरण शामिल हैं, जिनमें सोना और पैलेडियम जैसी कीमती धातुएं होती हैं।
विशेषज्ञों का कहना:
इस तकनीक से ना सिर्फ कीमती धातुओं की सस्ती और सुरक्षित रिकवरी संभव है, बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा भी होती है।