
नई दिल्ली।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक जहां एक ओर सुविधाओं और नवाचार का जरिया बनी है, वहीं दूसरी ओर इसका दुरुपयोग गंभीर सामाजिक चिंता का कारण बनता जा रहा है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक खतरनाक ट्रेंड सामने आया है, जिसमें AI की मदद से महिलाओं की तस्वीरों को अश्लील रूप में बदला जा रहा है। एलन मस्क की कंपनी xAI के चैटबॉट Grok का इस तरह के मामलों में इस्तेमाल किए जाने से यह मुद्दा और भी गंभीर हो गया है।
सिर्फ एक-दो पंक्तियों के निर्देश (प्रॉम्प्ट) देकर तस्वीरों से कपड़े “डिजिटली हटाने” जैसे कृत्य किए जा रहे हैं। इससे न सिर्फ महिलाओं की निजता का हनन हो रहा है, बल्कि उनकी सामाजिक छवि और मानसिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है।
क्या इंटरनेट से ऐसी तस्वीरें हटवाई जा सकती हैं?
इस सवाल का जवाब है—हां। अगर किसी की तस्वीर या वीडियो बिना सहमति के अश्लील रूप में इंटरनेट पर साझा की गई है, तो उसे हटवाने का एक प्रभावी और सुरक्षित तरीका मौजूद है। इसके लिए StopNCII.org नामक अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म की मदद ली जा सकती है।
क्या है StopNCII.org?
StopNCII का पूरा नाम है Stop Non-Consensual Intimate Image Abuse, यानी बिना सहमति के बनाई या बदली गई अंतरंग तस्वीरों के दुरुपयोग को रोकना। यह एक निःशुल्क ऑनलाइन टूल है, जिसे ऐसे पीड़ितों की सहायता के लिए तैयार किया गया है, जिनकी निजी तस्वीरें या वीडियो इंटरनेट पर गलत तरीके से फैलाए गए हों।
यह प्लेटफॉर्म Revenge Porn Helpline द्वारा संचालित किया जाता है, जो कि अंतरराष्ट्रीय चैरिटी संस्था SWGfL का हिस्सा है। संस्था का उद्देश्य तकनीक के दुरुपयोग से लोगों को सुरक्षित रखना है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
StopNCII की खास बात यह है कि इसमें पीड़ित को अपनी निजी तस्वीर या वीडियो कहीं अपलोड करने की जरूरत नहीं होती।
- सिस्टम फोटो या वीडियो का हैश (Hash) तैयार करता है।
- यह हैश एक तरह का डिजिटल फिंगरप्रिंट होता है, जो उस कंटेंट की पहचान करता है।
- इसके बाद यह हैश वैल्यू StopNCII अपने पार्टनर प्लेटफॉर्म्स (सोशल मीडिया और वेबसाइट्स) के साथ साझा करता है।
- जैसे ही वही तस्वीर या वीडियो कहीं भी अपलोड होती है, सिस्टम उसे पहचानकर हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देता है।
अभद्र फोटो या वीडियो हटवाने की प्रक्रिया
StopNCII.org की वेबसाइट पर जाकर होमपेज से केस क्रिएट किया जा सकता है।
- करीब 9 आसान स्टेप्स में तस्वीर या वीडियो से जुड़ी जानकारी देनी होती है।
- इसके बाद आपके डिवाइस पर ही कंटेंट को स्कैन कर हैश वैल्यू बनाई जाती है।
- यह हैश पार्टनर कंपनियों को भेजी जाती है, जो मिलते-जुलते कंटेंट को हटाने का काम करती हैं।
- केस दर्ज होने पर एक यूनिक केस आईडी मिलती है, जिससे आप अपनी शिकायत की प्रगति ट्रैक कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तरीका करीब 90 प्रतिशत तक प्रभावी माना जाता है।
बढ़ती चुनौती, जरूरी सतर्कता
AI के इस दौर में किसी की तस्वीर को गलत तरीके से इस्तेमाल करना बेहद आसान हो गया है। ऐसे में जरूरी है कि लोग न सिर्फ सतर्क रहें, बल्कि यह भी जानें कि अगर उनके साथ ऐसा होता है तो कानूनी और तकनीकी रूप से क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष:
तकनीक का इस्तेमाल सुविधा के लिए हो, न कि किसी की गरिमा और निजता को ठेस पहुंचाने के लिए। StopNCII जैसे प्लेटफॉर्म इस लड़ाई में एक मजबूत सहारा हैं, जिनकी जानकारी हर इंटरनेट उपयोगकर्ता को होनी चाहिए।