
गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में मुस्लिम आबादी और जनगणना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना असम के लिए चिंता का विषय साबित होगी, क्योंकि इसमें बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
सरमा ने यह भी कहा कि संदिग्ध लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को चिन्हित करें और उचित प्रक्रिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि योग्य लोगों के नाम हटाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
जनगणना और डेमोग्राफिक बदलाव:
सरमा ने बताया कि 2011 की जनगणना में असम की कुल 3.12 करोड़ आबादी में से 1.07 करोड़ मुसलमान (34.22%) और 1.92 करोड़ हिंदू (61.47%) थे। यदि मौजूदा वृद्धि दर बनी रही, तो 2041 तक मुसलमानों की संख्या हिंदुओं के बराबर हो जाएगी।
जनगणना 2027 की तैयारियां:
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए दो चरणों में काम शुरू किया है। अप्रैल से सितंबर 2026 तक हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना होगी, इसके बाद फरवरी 2027 में मुख्य जनसंख्या गणना संपन्न होगी। इसे मूल रूप से 2021 में करना था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण स्थगित किया गया था।
सरमा का यह बयान विधानसभा चुनावों के दृष्टिगत असम में राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन सकता है।