
नई दिल्ली: दिल्ली दंगों के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिली। इस फैसले के बाद देश में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया और कानून पर सवाल उठाए।
ओवैसी ने याद दिलाया कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) में संशोधन यूपीए सरकार के दौरान किया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय आतंकवाद की परिभाषा में ऐसी बातें जोड़ी गईं थीं, जिनका दुरुपयोग संभव है। ओवैसी ने 2007-08 में लोकसभा में सवाल उठाया था कि “किसी भी अन्य तरीके से, चाहे वह किसी भी प्रकृति का हो” का क्या मतलब है।
उन्होंने कांग्रेस पर सीधे निशाना साधते हुए कहा, “आज उसी कानून के आधार पर दो नौजवानों को जमानत नहीं मिल रही है। इनमें से एक तो साढ़े पांच साल से जेल में है। क्या आजादी के बाद कांग्रेस का कोई नेता इतने लंबे समय तक जेल में रहा है?”
ओवैसी ने लोकसभा में क्लॉज 43D का जिक्र करते हुए कहा कि UAPA के तहत अल्पसंख्यक आरोपियों को चार्जशीट दाखिल होने से पहले 180 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है। उन्होंने कहा, “असलियत यही है कि सच्चाई और उम्मीद में बहुत बड़ा अंतर है। वर्दी वाले लोगों के मन में एक तरह की नफरत होती है।”
उन्होंने यह भी बताया कि UAPA आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए बनाया गया कानून है, जिसमें कुछ धाराओं के चलते जमानत पाना बहुत मुश्किल है। अगर अदालत को आरोप सही लगते हैं, तो वह जमानत देने से इंकार कर सकती है। इस कानून के तहत सरकार को संदिग्ध व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई करने का अधिकार भी मिलता है।
ओवैसी का यह बयान देश की सियासी बहस में नया मोड़ ला सकता है, क्योंकि उन्होंने सीधे कांग्रेस को कानून बनाने और उसके संभावित गलत इस्तेमाल के लिए जिम्मेदार ठहराया।