
विदेश में नौकरी का नाम सुनते ही बड़ी सैलरी और शानदार जीवनशैली की तस्वीर आंखों के सामने आ जाती है। आम धारणा है कि अगर पैकेज विदेश का है, तो जिंदगी अपने आप बेहतर हो जाती है। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? इसी सवाल का जवाब गूगल में काम करने वाले एक भारतीय टेक वर्कर ने बेहद व्यावहारिक और प्रभावशाली तरीके से दिया है।
गूगल के इंजीनियर वैभव अग्रवाल ने भारत और ब्रिटेन की सैलरी की तुलना करते हुए बताया कि सिर्फ करेंसी कन्वर्ज़न से किसी नौकरी की असली कीमत नहीं समझी जा सकती। उनका कहना है कि बेंगलुरू में ₹45 लाख का पैकेज, लंदन में ₹1.15 करोड़ (करीब 1.08 लाख पाउंड) की नौकरी से बेहतर जीवनशैली दे सकता है।
PPP से समझिए असली तस्वीर
वैभव ने अपनी तुलना परचेज़िंग पावर पैरिटी (PPP) के आधार पर की। PPP यह बताती है कि किसी देश में वही चीज़ें खरीदने के लिए कितना खर्च आता है। यानी सैलरी की असली ताकत इस बात से तय होती है कि आप उससे क्या-क्या खरीद और जी सकते हैं।
बेंगलुरू: आराम और लग्ज़री की जिंदगी
₹45 लाख सालाना कमाने वाला व्यक्ति बेंगलुरू में करीब ₹2.7 लाख महीना घर ला सकता है। इस आमदनी में:
- 50 हजार रुपये में लग्ज़री 2BHK अपार्टमेंट
- 5 हजार में कुक, 3 हजार में हाउस हेल्प
- कैब, ऑनलाइन ग्रॉसरी, बाहर खाना—सब कुछ किफायती
वैभव के मुताबिक, इस सैलरी पर बेंगलुरू में व्यक्ति टॉप 1% कमाने वालों में शामिल हो जाता है। ज़िंदगी आरामदायक होती है, जहां ज्यादातर काम दूसरों से करवाया जा सकता है। उनके शब्दों में—“यहां आप राजा की तरह रहते हैं।”
लंदन: ऊंची सैलरी, सामान्य जीवन
वहीं लंदन में 1.08 लाख पाउंड के पैकेज के बाद टैक्स और नेशनल इंश्योरेंस कटने के बाद हाथ में करीब 6100 पाउंड महीना आते हैं।
- सेंट्रल लंदन से बाहर एक कमरे का फ्लैट: 2200 पाउंड महीना
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर
- खुद खाना बनाना, घर साफ करना, बर्तन धोना
वैभव कहते हैं कि लंदन में घरेलू स्टाफ रखना सिर्फ बहुत अमीर लोगों के लिए संभव है। इतनी सैलरी पर भी व्यक्ति की जिंदगी अपर मिडिल क्लास तक सीमित रहती है—आरामदायक जरूर, लेकिन खास लग्ज़री के बिना।
फैसला क्या कहता है?
वैभव का साफ संदेश है—
“पाउंड को रुपये में मत बदलो, लाइफस्टाइल को लाइफस्टाइल से तुलना करो।”
अगर प्राथमिकता आराम, सुविधा और लग्ज़री है, तो भारत—खासकर बेंगलुरू—बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर कोई ग्लोबल एक्सपोज़र, साफ वातावरण और मजबूत करेंसी में कमाई चाहता है, तो लंदन आकर्षक है।
निष्कर्ष
यह तुलना बताती है कि बड़ी सैलरी हमेशा बेहतर जिंदगी की गारंटी नहीं होती। असली सवाल यह है कि आप किस तरह की जिंदगी जीना चाहते हैं—और आपकी कमाई उस जिंदगी को कितनी मजबूती से सहारा देती है।