
नई दिल्ली: वैश्विक टेक कंपनियों की वैल्यूएशन में बड़ा फेरबदल हुआ है। गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक ने सात साल में पहली बार iPhone बनाने वाली कंपनी एपल को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बनने का गौरव हासिल किया है।
अल्फाबेट का मार्केट कैप अब 3.892 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया है, जबकि ऐपल की वैल्यू 3.863 ट्रिलियन डॉलर रह गई है। वर्तमान में दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी एनवीडिया 4.604 ट्रिलियन डॉलर के साथ पहले स्थान पर बनी हुई है।
अल्फाबेट के शेयर बुधवार को 2.51 प्रतिशत की तेजी के साथ 322.43 डॉलर पर बंद हुए। पिछले एक साल में इस शेयर ने 64.73 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इसके विपरीत, ऐपल के शेयर में 0.77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 260.33 डॉलर पर बंद हुआ। ऐपल के शेयर ने पिछले एक साल में केवल 7.49 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाई। वहीं, एनवीडिया के शेयरों में इस दौरान 25.32 प्रतिशत की तेजी आई।
विशेषज्ञों के अनुसार, अल्फाबेट की वैल्यू में यह उछाल इसके जनरेटिव AI प्लेटफॉर्म Gemini के बढ़ते इस्तेमाल और Waymo की सफलता के कारण आया है। Waymo अमेरिका में रोबोटैक्सी मार्केट में एक प्रमुख खिलाड़ी है और यह फीनिक्स, सैन फ्रांसिस्को, लॉस एंजेल्स, अटलांटा और ऑस्टिन जैसे शहरों में आम लोगों के लिए कमर्शियल रोबोटैक्सी सेवाएं चला रहा है।
भारतीय मूल के सुंदर पिचाई अल्फाबेट के सीईओ हैं। आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से आगे की पढ़ाई पूरी की। पिचाई ने अपने करियर की शुरुआत मटेरियल इंजीनियर के रूप में की और 2004 में मैनेजमेंट एक्जीक्यूटिव के रूप में गूगल से जुड़े। 2015 में गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज ने उन्हें गूगल का CEO बनाया और 2019 में वह अल्फाबेट के सीईओ बने।
संक्षेप में, अल्फाबेट की इस उपलब्धि ने दिखा दिया कि AI और नई तकनीकों में निवेश करने वाली कंपनियाँ भविष्य में वैश्विक टेक क्षेत्र की दिशा तय कर सकती हैं।