Thursday, January 8

चायनीज मांझे से बाइक सवार का गला कटा, आहार नली तक पहुंचा घाव, तीन ऑपरेशन के बाद बची जान

 

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छिंदवाड़ा: प्रतिबंध के बावजूद बाजार में बिक रहा चायनीज मांझा एक बार फिर जानलेवा साबित होते-होते रह गया। छिंदवाड़ा जिले में बाइक से जा रहे एक व्यक्ति का गला चायनीज मांझे से बुरी तरह कट गया। मांझा इतना गहराई तक धंसा कि आहार नली तक बाहर दिखाई देने लगी। गंभीर हालत में तीन जटिल ऑपरेशन के बाद उसकी जान बचाई जा सकी।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बेनटेक्स ज्वेलरी का कारोबार करने वाले रामगिरी गोस्वामी 2 जनवरी को अपनी पत्नी के साथ बाइक से छिंदवाड़ा लौट रहे थे। चांद, बीसापुर कला और लिंगा होते हुए जब वे चंदन गांव स्थित शराब भट्टी के पास पहुंचे, तभी सड़क पर फैला चायनीज मांझा अचानक उनके गले में लिपट गया। तेज धारदार मांझे से उनका गला कट गया और खून तेजी से बहने लगा, जिससे वे बाइक पर ही लड़खड़ा गए।

 

पत्नी की सूझबूझ से बची जान

 

घटना के समय पीछे बैठी पत्नी ने हिम्मत और सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत अपने दुपट्टे और रुमाल से रामगिरी का गला कसकर बांध दिया, ताकि खून का बहाव रोका जा सके। इसके बाद उन्होंने तुरंत उनके दोस्तों को सूचना दी। समय पर मदद मिलने से रामगिरी को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां तत्काल इलाज शुरू किया गया।

 

आहार नली तक पहुंचा था घाव

 

डॉक्टरों के अनुसार, चायनीज मांझे से गला इतनी गहराई तक कट गया था कि आहार नली तक स्पष्ट दिखाई दे रही थी। हालत बेहद नाजुक थी। इलाज के दौरान अलग-अलग चरणों में तीन ऑपरेशन किए गए। करीब चार दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ।

 

43 टांके, तीन महीने आराम की सलाह

 

रामगिरी गोस्वामी के गले में कुल 43 टांके लगाए गए हैं। बुधवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें तीन महीने तक पूर्ण आराम करने और ठोस भोजन से परहेज की सलाह दी है। फिलहाल वे केवल लिक्विड डाइट पर हैं और नियमित फॉलोअप इलाज जारी है।

 

यह हादसा रामगिरी के परिवार के लिए आर्थिक रूप से भी बड़ा झटका साबित हुआ है। इलाज पर अब तक करीब 40 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। इस घटना ने एक बार फिर प्रतिबंधित चायनीज मांझे की खुलेआम बिक्री और उस पर प्रभावी कार्रवाई न होने को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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