
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मेडिकल लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रतिष्ठित एरा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पर ऑपरेशन के दौरान मरीज के पेट में सर्जिकल सामान छोड़ने का आरोप लगा है। कोर्ट के आदेश पर इस मामले में अस्पताल के 13 डॉक्टरों और दो मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
दर्द होता रहा, दवाइयों से टरकाते रहे डॉक्टर
पीड़ित महिला रूपा शर्मा सिंह वर्ष 2023 में पेट दर्द की शिकायत लेकर एरा अस्पताल पहुंची थीं। डॉक्टरों ने 5 जनवरी 2023 को ऑपरेशन की सलाह दी, जिसके बाद महिला को 15 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। 27 फरवरी 2023 को पहला ऑपरेशन किया गया, लेकिन इसके बाद भी महिला की तकलीफ कम नहीं हुई।
लगातार दर्द की शिकायत पर 17 मार्च 2023 को महिला का दोबारा ऑपरेशन किया गया। आरोप है कि इसके बावजूद दर्द बना रहा और डॉक्टरों ने गंभीरता से जांच करने के बजाय केवल दर्द निवारक दवाइयां देते रहे।
जांच रिपोर्ट छिपाने का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि बाद में हुई जांच में पेट के अंदर सर्जिकल सामान होने की जानकारी सामने आई, लेकिन इसे जानबूझकर छिपा लिया गया। संदेह होने पर परिवार ने चरक अस्पताल में जांच कराई, जहां पेट में सर्जिकल सामान होने की पुष्टि हुई।
इसके बाद 20 अगस्त 2023 को महिला का तीसरी बार ऑपरेशन किया गया, जिसमें पेट से सर्जिकल सामान निकाला गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि एरा अस्पताल ने इलाज के नाम पर करीब पांच लाख रुपये वसूल लिए।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ केस
पीड़ित परिवार ने पहले पुलिस से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद कोर्ट का सहारा लिया गया। न्यायालय के आदेश पर ठाकुरगंज थाना पुलिस ने एरा अस्पताल के 13 डॉक्टरों और दो मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
इन पर दर्ज हुई एफआईआर
एफआईआर में अस्पताल के मालिक मोहसिन अली खान और मीमस अली खान के अलावा
डॉ. फरजाना, डॉ. जमाल मोहम्मद, डॉ. आयुष वर्मा, डॉ. सुमन, डॉ. नूपुर, असिस्टेंट जेआर डॉ. श्रीतिया कसवी, कंसल्टेंट डॉ. अहमद अंसारी, डॉ. ओसमान मूसा हिंगोरा, डॉ. वकार, डॉ. सिद्दीकी, डॉ. पृथ्वी, डॉ. कृष्ण और डॉ. सुरजीत बसु के नाम शामिल हैं।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। मेडिकल रिकॉर्ड, ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज और डॉक्टरों की भूमिका की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के सामने आने के बाद निजी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।