Thursday, January 8

युवा दिवस 2026: ‘गर्व करो कि तुम भारतीय हो…’ विवेकानंद जयंती पर दें दमदार भाषण

 

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हर साल 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। यह दिन स्वामी विवेकानंद की जयंती के साथ-साथ युवाओं की शक्ति, क्षमता और कर्तव्य के सम्मान में भी समर्पित है। स्वामी विवेकानंद का मानना था कि समाज में बदलाव की असली शक्ति युवा पीढ़ी के पास होती है। उन्होंने कहा था, “गर्व करो कि तुम भारतीय हो और अभिमान के साथ यह घोषणा करो कि हम भारतीय हैं और प्रत्येक भारतीय हमारा भाई है।”

 

युवा दिवस पर भाषण कैसे दें?

 

युवा दिवस पर भाषण शुरू करने के लिए आप इस तरह बोल सकते हैं:

 

“सभी को सुप्रभात। आज हम राष्ट्रीय युवा दिवस और स्वामी विवेकानंद जयंती मनाने के लिए एकत्र हुए हैं। स्वामी जी ने हमारे देशवासियों को उठने और चमकने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने हर युवा से साहस, ज्ञान और आत्मविश्वास अपनाने का आग्रह किया। उनकी शिक्षाएं हमें बड़े सपने देखने, निडर होकर काम करने और गर्व के साथ समाज में योगदान देने की प्रेरणा देती हैं।”

 

स्वामी विवेकानंद ने 1897 में किसी से कहा था कि “गुलाम का कोई धर्म नहीं होता और अगले 50 वर्षों तक केवल भारत को गुलामी से आजाद करना ही तुम्हारा धर्म है।” उनके विचार आज भी युवाओं को प्रेरित करते हैं।

 

विवेकानंद जयंती का महत्व

 

स्वामी विवेकानंद का संदेश था कि एकता, एकजुटता, सहयोग और शांति ही समाज की ताकत हैं। उनका प्रसिद्ध शिकागो भाषण 11 सितंबर 1893 में युवाओं और दुनिया को यही संदेश मिला। स्वामी जी कहते थे कि नया भारत मोची की दुकान, फैक्ट्रियां, बाजार, झुग्गियां, जंगल और खेत-खलिहानों से उभरेगा। यह नया भारत भारत माता को दुनिया का गुरु बनाएगा।

 

राष्ट्रीय युवा दिवस क्यों मनाते हैं?

 

राष्ट्रीय युवा दिवस का उद्देश्य युवाओं में कर्तव्यबोध, आत्मविश्वास और समाज सेवा की भावना बढ़ाना है। यह दिन युवाओं को उनके सपनों और जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है। स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत और मार्गदर्शक का काम करते हैं।

 

भाषण का सुझाव

 

युवाओं को अपने भाषण में स्वामी विवेकानंद के विचारों को शामिल करना चाहिए और यह दर्शाना चाहिए कि कैसे वे अपनी पढ़ाई, दूसरों की मदद और समाज में योगदान के माध्यम से बदलाव ला सकते हैं। इस दिन उन्हें यह संदेश देना चाहिए कि “हम जैसे सोचते हैं, वैसे ही बनते हैं।”

 

 

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