Thursday, January 8

सपनों की उड़ान: गरीबी को मात देकर बेटी ने गोल्ड जीता

जौनपुर/नई दिल्ली। – सपने बड़े हों और हौसला बुलंद हो, तो गरीबी भी रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है एथलीट ऐश्वर्या मिश्रा ने, जिन्होंने अपने कठिन संघर्ष और पिता के समर्थन के दम पर देश के लिए गोल्ड मेडल जीता।

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जौनपुर के रहने वाले कैलाश मिश्रा खुद कबड्डी खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने डिस्ट्रिक्ट लेवल तक खेला और मुंबई में महाराष्ट्र टीम के लिए भी मैदान में उतर चुके थे। लेकिन रोज़ी-रोटी की मजबूरी के कारण उन्हें खेल को अलविदा कहना पड़ा। यही कारण था कि उन्होंने अपनी बेटी को कभी सपनों की उड़ान भरने से रोका नहीं।

जब ऐश्वर्या ने बचपन में खेलों में रुचि दिखाई, तो कैलाश मिश्रा ने हर तरह से उसे प्रोत्साहित किया। समाज के तानों और सवालों को नजरअंदाज करते हुए उन्होंने अपनी बेटी के लिए बड़े सपने देखे और उन्हें सच करने का मार्ग दिखाया।

ऐश्वर्या ने स्कूल की पढ़ाई के दौरान मैराथन दौड़ना शुरू किया। हालांकि शुरुआती दौर में उन्हें सही दिशा नहीं मिली, लेकिन कॉलेज में कोच सुमित सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने स्पोर्ट्स में कदम रखा। सीमित साधनों के बावजूद ऐश्वर्या ने हर चुनौती को अवसर में बदल दिया।

एक उदाहरण है उनकी पहली नेशनल रेस का। पिता ने मेहनत से स्पाइक जूते खरीदे, लेकिन जूते छोटे निकले। फिर भी ऐश्वर्या ने खून से लथपथ पैरों के साथ दौड़ पूरी की और पहला नेशनल गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

अपने अभाव और कठिनाइयों के बावजूद ऐश्वर्या ने लगातार सफलता की नई इबारत लिखी। उन्होंने एशियन गेम्स 2023 में 4×400 मीटर रिले में सिल्वर मेडल और 38वें नेशनल गेम्स 2025 में 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया।

आज ऐश्वर्या मिश्रा की कहानी लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो दिखाती है कि अगर परिवार का समर्थन और आत्मविश्वास हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं।

 

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