
नई दिल्ली।
भारत के लिए कच्चे तेल के मोर्चे पर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। फरवरी 2021 के बाद पहली बार भारतीय क्रूड ऑयल बास्केट की औसत कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 में भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत घटकर 59.92 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई, जबकि दिसंबर 2025 में यह 62.2 डॉलर प्रति बैरल थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जारी नरमी का सीधा असर आने वाले दिनों में घरेलू पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतों पर भी पड़ सकता है। भारत में ईंधन की कीमतों की दैनिक समीक्षा व्यवस्था के चलते कच्चे तेल में गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने की संभावना बढ़ गई है।
जून 2026 तक 50 डॉलर से नीचे जा सकता है क्रूड
एसबीआई रिसर्च की 5 जनवरी को जारी रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि जून 2026 तक भारतीय क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत 50 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी कम हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 तक यह कीमत घटकर 53.31 डॉलर प्रति बैरल तक आने की संभावना है।
विश्लेषकों के मुताबिक वैश्विक बाजार में मांग की तुलना में सप्लाई अधिक बने रहने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रहेगा।
आयात बिल पर भारी राहत
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 1 डॉलर की कमी से भारत के सालाना आयात खर्च में करीब 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।
पिछले वित्तीय वर्ष में भारत ने लगभग 161 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया था। वहीं चालू वित्त वर्ष में नवंबर 2025 तक यह आयात बिल घटकर 80.9 अरब डॉलर रह गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 92 अरब डॉलर था।
सप्लाई ज्यादा, मांग सीमित
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई मांग से लगभग 38.5 लाख बैरल प्रतिदिन अधिक रह सकती है, जो कुल वैश्विक मांग का करीब 4 प्रतिशत है। यही वजह है कि लंबी अवधि में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
सऊदी अरब ने भी घटाई कीमतें
तेल बाजार में नरमी का संकेत देते हुए सऊदी अरब ने लगातार तीसरी बार एशियाई खरीदारों के लिए अपने कच्चे तेल की कीमतों में कटौती की है। फरवरी लोडिंग के लिए अरब लाइट क्रूड का आधिकारिक बिक्री मूल्य ओमान/दुबई औसत से मात्र 0.30 डॉलर प्रति बैरल ऊपर तय किया गया है, जो पिछले महीने 0.60 डॉलर था।
पेट्रोल-डीजल सस्ते होने की उम्मीद
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह नीचे बनी रहती हैं, तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतों में कटौती संभव है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक घटनाक्रमों के कारण अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से इंकार नहीं किया जा सकता।
कुल मिलाकर, कच्चे तेल की कीमतों में आई यह गिरावट भारत के लिए आर्थिक दृष्टि से सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, जिससे न केवल आयात बिल घटेगा बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी महंगाई से कुछ राहत मिल सकती है।