
नई दिल्ली: दिल्ली और भारत के अन्य शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण ने देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। प्रदूषण की समस्या दिन-प्रतिदिन विकट होती जा रही है, जिससे स्वास्थ्य संकट भी पैदा हो रहा है। विकसित देशों ने इस चुनौती का समाधान खोजने के लिए ‘कार्बन क्रेडिट’ जैसी व्यवस्था अपनाई है, और अब भारत को भी इस व्यवस्था को अपनाने की जरूरत है। इससे प्रदूषण पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण
दिल्ली कई वर्षों से दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। सर्दियों के दौरान ‘बहुत खतरनाक’ प्रदूषण की स्थिति ने यहां के नागरिकों के जीवन को मुश्किल बना दिया है। प्रदूषण से होने वाली बीमारियों और इसके कारण होने वाले श्रमबल पर प्रभाव के कारण अनुमानित तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था को हर साल 100 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है। प्रदूषण के प्रमुख कारणों में भौगोलिक स्थिति, पराली जलाने, शहरीकरण, और वाहनों व कारखानों से निकलने वाले धुएं को प्रमुख रूप से माना जाता है।
कार्बन क्रेडिट: एक प्रभावी समाधान
दुनिया के विकसित देशों ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ‘कार्बन क्रेडिट’ जैसी व्यवस्था अपनाई है। अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों ने इस प्रणाली को लागू कर प्रदूषण को नियंत्रित किया। इन देशों ने प्रदूषक गैसों के उत्सर्जन की सीमा तय की, और अगर कोई देश निर्धारित सीमा से अधिक उत्सर्जन करता था, तो उसे भारी जुर्माना देना पड़ता था। इसके अलावा, फैक्ट्रियों को अपने उत्सर्जन कोटे को बचाने और दूसरों को हस्तांतरित करने की स्वतंत्रता दी गई थी।
इस व्यवस्था में आम नागरिकों को भी पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया गया, और जो लोग पेड़ लगाते थे, उन्हें ‘कार्बन क्रेडिट’ का मौका दिया जाता था, जिसे वे बेच सकते थे। इससे न केवल प्रदूषण को नियंत्रित किया गया, बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी योगदान मिला।
भारत में कार्बन क्रेडिट की संभावना
भारत में, जहां प्रदूषण का मुख्य कारण शहरीकरण और औद्योगिकीकरण है, कार्बन क्रेडिट जैसी व्यवस्था लागू करने से प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। दिल्ली में तंदूर और कोयले वाले प्रेस जैसे प्रदूषणकारी उपकरणों पर प्रतिबंध लगाना गरीबों के लिए कठिनाई पैदा कर सकता है। ऐसे में, कार्बन क्रेडिट व्यवस्था लागू करने से बिना किसी विरोध और शोर के प्रदूषण कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष:
भारत को प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए कार्बन क्रेडिट जैसी प्रभावी व्यवस्था अपनानी चाहिए। इससे न केवल प्रदूषण पर नियंत्रण होगा, बल्कि देश के नागरिकों को भी इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का मौका मिलेगा। अगर यह व्यवस्था सही तरीके से लागू की जाती है, तो भारत भी प्रदूषण की समस्या पर काबू पा सकता है, जैसा कि अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन ने किया है।