
दो साध्वियों से दुष्कर्म और एक पत्रकार की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर पैरोल पर जेल से बाहर आ गया है। सोमवार को उसे रोहतक की सुनारिया जेल से रिहा किया गया। इस बार भी उसे 40 दिन की पैरोल दी गई है। इसके साथ ही राम रहीम को बार-बार दी जा रही पैरोल को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। सवाल उठने लगे हैं कि यह सजा है या फिर सुविधाओं का सिलसिला।
जानकारी के अनुसार, 2017 में सजा सुनाए जाने के बाद से अब तक गुरमीत राम रहीम को 15वीं बार पैरोल मिली है। ताजा पैरोल का आधिकारिक कारण डेरा सच्चा सौदा के दूसरे प्रमुख शाह सतनाम सिंह की 25 जनवरी को होने वाली जयंती में शामिल होना बताया गया है। यह पैरोल रोहतक डिविजनल कमिश्नर की मंजूरी से दी गई।
पैरोल का लंबा इतिहास
गुरमीत राम रहीम को पहली बार 24 अक्टूबर 2020 को एक दिन की पैरोल मिली थी। इसके बाद 2022 से पैरोल की अवधि और आवृत्ति लगातार बढ़ती गई। कभी 21 दिन, कभी 30 दिन, तो कभी 40 और 50 दिन तक की पैरोल दी गई। ताजा 40 दिन की पैरोल को जोड़कर राम रहीम अब तक कुल 405 दिन जेल के बाहर बिता चुका है, जो एक साल से भी अधिक का समय है।
चुनावी दौर में भी रहा बाहर
राम रहीम की पैरोल को लेकर विवाद इसलिए भी गहराता रहा है, क्योंकि वह कई बार चुनावी दौर में जेल से बाहर आया। हरियाणा विधानसभा चुनाव, पंजाब विधानसभा चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव और उपचुनावों के दौरान उसकी रिहाई पर सवाल उठे। आरोप लगते रहे कि वह पैरोल के दौरान डेरा अनुयायियों को राजनीतिक संदेश देता रहा है। हालांकि प्रशासन और सरकार की ओर से हर बार नियमों के तहत पैरोल दिए जाने की बात कही गई।
वीडियो और प्रवचन भी बने विवाद का कारण
पिछले साल अगस्त में अपने 58वें जन्मदिन पर मिली पैरोल के दौरान राम रहीम के कई वीडियो सामने आए थे, जिनमें वह प्रवचन देता नजर आया। इसके बाद यह सवाल और गहराया कि एक सजायाफ्ता अपराधी को सार्वजनिक गतिविधियों में शामिल होने और संदेश देने की अनुमति कैसे दी जा सकती है।
सवाल बरकरार
लगातार मिल रही पैरोल ने न्याय व्यवस्था और जेल नियमों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर गंभीर अपराधों में दोषी करार दिया गया व्यक्ति है, तो दूसरी ओर बार-बार दी जा रही लंबी पैरोल। ऐसे में आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या यह वास्तव में सजा है या फिर कानून के भीतर रहकर दी जा रही विशेष सुविधा।
फिलहाल, गुरमीत राम रहीम की रिहाई के साथ ही यह बहस फिर से केंद्र में आ गई है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और कानूनी प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।