
नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026-27 अगले महीने 1 या 2 फरवरी को पेश किया जा सकता है। इस बार सरकार महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने के लिए कई खास योजनाओं की घोषणा कर सकती है। इसमें जन धन खातों के जरिए महिलाओं को अधिक क्रेडिट (लोन), बीमा सुरक्षा और विशेष वित्तीय सेवाओं की सुविधा मिलने की संभावना है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक तक वित्तीय सेवाएं पहुंचें और लोगों की शिकायतों को तेजी से सुलझाया जा सके। बीमा क्लेम से जुड़ी समस्याओं को कम करने और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
खास पहलों पर जोर
बजट में महिलाओं के लिए विशेष क्रेडिट कार्ड, लोन योजनाएं और बीमा प्लान पेश किए जा सकते हैं। पिछले साल की गई पहलें, जैसे ग्रामीण क्रेडिट स्कोर और पहली बार कारोबार शुरू करने वालों के लिए आर्थिक मदद, अब और विस्तार पा सकती हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे कारोबार और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कर्ज उपलब्ध कराने के सुझावों पर भी विचार किया जा रहा है।
बंद खाते फिर चालू
सरकार जनधन खातों के मूल्यांकन के बाद उन खातों को फिर से सक्रिय करने की योजना बना रही है जो फिलहाल बंद हैं। इन खातों में बीमा और कर्ज की सुविधा बढ़ाकर लोगों को उन्हें चालू रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। नीति आयोग का कहना है कि इससे वित्तीय साक्षरता बढ़ेगी और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
वित्तीय समावेशन और विकसित भारत
अधिकारी बताते हैं कि सरकार का उद्देश्य 100% लोगों तक बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। यह पहल विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से भी जुड़ी है। ग्राहकों के लिए लावारिस पैसों की वापसी और बीमा क्लेम से जुड़ी शिकायतों को मजबूत नियामक निगरानी के तहत सुलझाना भी बजट की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।
इस बजट से महिलाओं के लिए वित्तीय स्वतंत्रता और सुरक्षा के नए अवसर खुल सकते हैं, जिससे उनका आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।