Saturday, January 31

19 राज्यों में घर बैठे डाउनलोड होंगे जमीन के कागजात, खरीद-बिक्री और लोन में आसानी

 

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केंद्र सरकार ने 19 राज्यों में जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने का बड़ा कदम उठाया है। अब नागरिक घर बैठे ही अपने लैंड रिकॉर्ड ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि डिजिटल रूप में प्राप्त कागजात कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य होंगे।

 

ऑनलाइन मॉर्गेज और लोन की सुविधा

सरकार के अनुसार, 406 जिलों में बैंक अब जमीन गिरवी रखने (मॉर्गेज) की जानकारी ऑनलाइन ही जांच सकेंगे, जिससे लोन मिलने की प्रक्रिया तेज और आसान हो जाएगी। भूमि संसाधन विभाग ने डिजिटल रिकॉर्ड बनाने का काम लगभग पूरा कर लिया है।

 

ग्रामीण और शहरी भूमि रिकॉर्ड डिजिटल

देश के 97 प्रतिशत से ज्यादा गांवों में जमीन के अधिकार और नक्शे कंप्यूटर पर दर्ज किए जा चुके हैं। करीब 85 प्रतिशत गांवों में रिकॉर्ड और नक्शे आपस में लिंक कर दिए गए हैं। शहरी क्षेत्रों में ‘एनएकेएसएचए’ योजना के तहत 157 शहरी स्थानीय निकायों में हवाई सर्वे और जमीन जांच का काम जारी है।

 

1,050 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता और यूएलपीआईएन पहचान

सरकार ने 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को डिजिटल रिकॉर्ड पूरा करने के लिए 1,050 करोड़ रुपए की सहायता मंजूर की है। इसके साथ ही जमीनों के लिए 14 अंकों वाला यूएलपीआईएन नंबर शुरू किया गया है, जिसे जमीन का आधार कार्ड कहा जा रहा है। नवंबर 2025 तक 36 करोड़ से अधिक लैंड पार्सल को यह नंबर दिया जा चुका है।

 

खरीद-बिक्री हुई आसान और पारदर्शी

राष्ट्रीय दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस) से जमीन की खरीद-बिक्री आसान हो गई है। यह प्रणाली पंजाब, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश सहित 17 राज्यों में लागू है। लगभग 88 प्रतिशत सब-रजिस्ट्रार ऑफिस अब राजस्व कार्यालयों से जुड़ चुके हैं, जिससे रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद रिकॉर्ड अपडेट हो जाता है।

 

सरकार का कहना है कि इन उपायों से जमीन से जुड़े काम तेज, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बन गए हैं।

 

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