
देश के शीर्ष मेडिकल संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में फैकल्टी डॉक्टरों की भारी कमी सामने आई है। दिल्ली समेत 11 AIIMS में लगभग 39% स्वीकृत पद खाली हैं। इस कमी के कारण मरीजों की देखभाल, विशेषज्ञ सेवाओं और मेडिकल शिक्षा पर असर पड़ने की गंभीर चिंता जताई जा रही है।
AIIMS दिल्ली सबसे अधिक प्रभावित
देश का सबसे पुराना और बड़ा AIIMS, दिल्ली, मुख्य विभागों में 1,306 स्वीकृत फैकल्टी पदों में से 524 पद खाली होने की स्थिति में है। इसका मतलब है कि करीब 40% पदों पर अभी भी डॉक्टर नहीं हैं।
नए AIIMS में और अधिक कमी
AIIMS जोधपुर – 405 पदों में से 189 (46.7%) खाली
AIIMS गोरखपुर – 45.5% पद खाली
AIIMS जम्मू – 44.3% पद खाली
AIIMS कल्याणी और बिलासपुर – 40% से अधिक पद खाली
AIIMS नागपुर – 373 पदों में से 137 (36.7%) खाली
दूसरे संस्थानों में कमी थोड़ी कम है, फिर भी चिंता का विषय बनी हुई है:
AIIMS बठिंडा – 37.4%
AIIMS रायपुर – 34.8%
AIIMS भुवनेश्वर – 26%
AIIMS भोपाल – 25.6%
हेल्थ एक्सपर्ट्स की चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक फैकल्टी की कमी से आउटपेशेंट सेवाओं, सर्जरी शेड्यूल, ICU सुपरविज़न और डॉक्टर्स की ट्रेनिंग प्रभावित होती है। सीनियर फैकल्टी को क्लिनिकल, शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां एक साथ निभानी पड़ती हैं।
AIIMS की प्रतिक्रिया
AIIMS दिल्ली की मीडिया सेल इंचार्ज रीमा दादा ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया जारी है और खाली पदों को भरने के लिए इंटरव्यू चल रहे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि अस्पताल हर साल लाखों मरीजों का इलाज कर रहे हैं और भर्ती प्रक्रिया नियमित रूप से चल रही है।
RTI डेटा के अनुसार, तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी भर्ती की गति के बीच भारी अंतर है। यह सवाल उठता है कि क्या देश के प्रमुख मेडिकल संस्थान बढ़ती हेल्थकेयर मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध करा पा रहे हैं।