Thursday, May 21

This slideshow requires JavaScript.

बिहार चुनाव के बाद पहली सार्वजनिक मौजूदगी: दिल्ली विश्वविद्यालय में युवाओं से संवाद करेंगे प्रशांत किशोर, 21 दिसंबर को देंगे खास व्याख्यान

बिहार चुनाव के बाद लंबे समय से सार्वजनिक मंचों से दूर रहे चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर (PK) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वे 21 दिसंबर 2025 को दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करेंगे। यह विशेष सत्र विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सर शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में दोपहर 2 बजे से आयोजित होगा।

This slideshow requires JavaScript.

इस कार्यक्रम का विषय है —
“लोकतांत्रिक राजनीतिक नेतृत्व: गैर-विरासत के उम्मीदवारों के लिए अवसर और चुनौतियाँ”
यह सत्र खास तौर पर उन युवाओं के लिए मार्गदर्शक माना जा रहा है, जो बिना किसी राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि के राजनीति और सार्वजनिक नेतृत्व में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।

गैर-विरासत की राजनीति पर PK का फोकस
भारतीय राजनीति में वंशवाद के प्रभाव को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है। ऐसे में प्रशांत किशोर अपने संबोधन में यह स्पष्ट करने की कोशिश करेंगे कि किस तरह साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले योग्य और प्रतिबद्ध युवा भी राजनीतिक व्यवस्था में जगह बना सकते हैं। वे गैर-विरासत वाले उम्मीदवारों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, संगठन निर्माण, जनसमर्थन और रणनीतिक सोच जैसे पहलुओं पर विस्तार से बात करेंगे।

एकतरफा भाषण नहीं, सीधा संवाद
यह कार्यक्रम केवल भाषण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे इंटरैक्टिव सत्र के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसमें छात्र और शिक्षक सीधे प्रशांत किशोर से सवाल पूछ सकेंगे और अपने विचार साझा कर सकेंगे। अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और चुनावी रणनीतियों के जरिए PK युवाओं को राजनीति में करियर, नेतृत्व और जनसंपर्क की बारीकियों से रूबरू कराएंगे।

छात्रों के लिए खास अवसर
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों और संकाय सदस्यों के लिए यह एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और वैचारिक अवसर माना जा रहा है। हालांकि सत्र सभी के लिए खुला है, लेकिन हॉल की सीमित क्षमता को देखते हुए प्रवेश केवल निमंत्रण के आधार पर ही दिया जाएगा। इच्छुक प्रतिभागी जारी किए गए आधिकारिक QR कोड या URL के माध्यम से अपना निःशुल्क निमंत्रण पत्र प्राप्त कर सकते हैं।

भविष्य की राजनीति पर मंथन
यह संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब देश की राजनीति में नए चेहरों, नई सोच और वैकल्पिक नेतृत्व की मांग लगातार बढ़ रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में इस तरह की चर्चा न केवल राजनीतिक विमर्श को समृद्ध करेगी, बल्कि युवाओं को लोकतंत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए भी प्रेरित करेगी।

Leave a Reply