डॉलर के मुकाबले रुपया 91 के पार सरकार की चुप्पी पर सवाल, रणनीति या मजबूरी?
नई दिल्ली।भारतीय मुद्रा बाजार में मंगलवार को एक ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिला, जब रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91 के स्तर को पार कर गया। रुपये की इस तेज गिरावट ने न केवल निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस गिरावट को थामने के लिए सक्रिय दखल क्यों नहीं दे रहे हैं। क्या यह एक सोची-समझी आर्थिक रणनीति है या फिर वैश्विक दबावों के आगे मजबूरी?
क्यों फिसला रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर परविशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये की कमजोरी के पीछे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली प्रमुख कारण हैं। विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार से पूंजी निकालने से डॉलर की मांग बढ़ी, जिससे रुपये पर दबाव गहराता चला गया।एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार का कहना है कि बेहतर व्यापा...









