Wednesday, May 20

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बुंदेलखंड में चीता प्रोजेक्ट का बिगुल: वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छलांग भरेंगे अफ्रीकन चीते

सागर, मध्य प्रदेश: बुंदेलखंड के सागर जिले में wildlife प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में जल्द ही अफ्रीकन चीते प्राकृतिक वातावरण में छलांग भरते दिखाई देंगे। यहां चीता प्रोजेक्ट के तहत ग्राउंड स्तर पर तैयारियाँ जोरों पर हैं। टाइगर रिजर्व में ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ और ‘क्वारेंटाइन बोमा’ बनाये जा रहे हैं, जिनमें नए आगंतुक चीतों को सुरक्षित रखा जाएगा।

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जानकारी के अनुसार, नौरादेही देश का पहला ऐसा टाइगर रिजर्व बनने जा रहा है जहां बाघ, तेंदुआ और चीता—तीनों ‘बिग कैट’ एक साथ देखे जा सकेंगे। चीतों को बसाने के लिए टाइगर रिजर्व का दमोह क्षेत्र विशेष रूप से चुना गया है। यहां खुली घास के मैदान हैं, जिससे चीतों को प्राकृतिक आवास के समान वातावरण मिलेगा और मानव-जीव संघर्ष की संभावना न्यूनतम होगी।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) की विशेषज्ञ टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण कर बोमा निर्माण की सलाह दी थी। अप्रैल माह तक 600 हेक्टेयर में आठ अलग-अलग बोमा तैयार हो जाएंगे। इसके बाद मई-जून में अफ्रीका के बोत्सवाना से आए 8 चीतों को यहां शिफ्ट किया जाएगा। शिफ्टिंग के पहले महीने तक उन्हें क्वारेंटाइन बोमा में रखा जाएगा, ताकि उनकी निगरानी की जा सके और वे नए वातावरण के अनुकूल हो सकें।

8 सालों से जारी पुनर्स्थापन कार्य:
नौरादेही अभयारण्य में वर्ष 2018 में बाघ-बाधिन की जोड़ी छोड़ी गई थी। इसके बाद यह क्षेत्र वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया गया। पिछले वर्षों में विस्तार, वन्य जीव संरक्षण और पुनर्स्थापन कार्य निरंतर जारी रहा है। हाल ही में कान्हा टाइगर रिजर्व का अनाथ बाघ भी यहां छोड़ा गया था।

टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 2339 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 1414 वर्ग किलोमीटर कोर एरिया और 925.12 वर्ग किलोमीटर बफर एरिया शामिल है। मुहली, सिंगपुर और झापन रेंज को चीतों के लिए उपयुक्त माना गया है, जहां घने घास के मैदान और खुला क्षेत्र उन्हें लंबी दूरी तक विचरण करने की स्वतंत्रता देगा।

यदि यह शिफ्टिंग प्रोजेक्ट सफल रहा, तो नौरादेही टाइगर रिजर्व पूरे देश में ऐसा पहला रिजर्व बनेगा, जहां एक साथ तीनों ‘बिग कैट’ देखने को मिलेंगे—एक ऐतिहासिक क्षण वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में।

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