
नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर लगाए गए टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। इस फैसले से टेक्सटाइल, दवा, मोटर पार्ट्स, क्रिस्टल और हैंडीक्राफ्ट जैसे कई सेक्टरों को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसके चलते राजधानी दिल्ली में करीब 1,000 करोड़ रुपये के कारोबार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
टैरिफ कटौती से उद्योगों को राहत
लंबे समय से ऊंचे टैरिफ के दबाव में जूझ रहे भारतीय एक्सपोर्टर्स ने अमेरिकी बाजार में अपनी कीमतों की प्रतिस्पर्धात्मकता खो दी थी। कई कंपनियों के ऑर्डर रुक गए और कुछ फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर पहुंच गईं, जिससे हजारों लोगों की नौकरियां चली गईं। टैरिफ में राहत मिलने से इंडियन प्रोडक्ट की मांग फिर बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
टेक्सटाइल और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को फायदा
हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के नैशनल प्रेजिडेंट सीपी शर्मा के अनुसार, छह महीने से कारोबार संकट में था। भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने भी अमेरिका पर दबाव बनाया और अब भारतीय एक्सपोर्टर्स को राहत मिली है।
दवा और फार्मा सेक्टर में तेजी
बीपी, कैंसर, अस्थमा, एंटीबायोटिक और इंजेक्शन जैसी दवाओं का अमेरिकी बाजार में कारोबार लगभग तीन महीने तक ठप रहा था। टैरिफ घटने से सप्लाई फिर से तेजी से शुरू होगी। दवाओं की मांग बढ़ने के साथ-साथ इंडियन उत्पाद किफायती और असरदार दोनों साबित होंगे।
मोटर पार्ट्स और क्रिस्टल सेक्टर की रफ्तार
कश्मीरी गेट ऑटो पार्ट्स के कारोबारी विनय नारंग के मुताबिक, अमेरिका में बाइक और गाड़ियों के पुर्जे भेजने का कारोबार 15% घट गया था। टैरिफ में कटौती से यह कारोबार पुनः रफ्तार पकड़ेगा। क्रिस्टल और जूलरी जैसे उत्पादों की मांग भी फिर से बढ़ने की उम्मीद है।
दिल्ली में 1000 करोड़ रुपये का कारोबार
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस अमेरिकी राहत के फैसले से दिल्ली में टेक्सटाइल, चमड़ा, दवा और फार्मा, केमिकल, जेम्स एंड जूलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों में करीब 1,000 करोड़ रुपये का कारोबार बढ़ सकता है।
निष्कर्ष:
अमेरिका द्वारा टैरिफ घटाने का फैसला भारतीय निर्यातकों के लिए राहत और नए अवसर लेकर आया है। इससे न केवल कारोबार में बहार आएगी, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।